क्या पुलिस और कोर्ट की ड्रेस का रंग बदल कर सुधार सकते हैं समाज?

फिल्म 'जॉली एलएलबी 2' के एक दृश्य में जज साहब कहते हैं- आज भी हिन्दुस्तान में जब कहीं दो लोगों के बीच में झगड़ा होता है न, कोई विवाद होता है तो वे एक-दूसरे से क्या कहते हुए पाए जाते हैं- 'आई विल सी यू इन कोर्ट' (मैं तुम्हें कोर्ट में देख लूंगा)।
 
क्यों करते हैं भाई लोग ऐसा? क्योंकि आज भी लोग भरोसा करते हैं- भरोसा करते हैं न्यायपालिका पर। और उनको भरोसा होता है कि अगर सरकार उनकी बात नहीं सुनेगी, प्रशासन उनकी बात नहीं सुनेगा, पुलिस उनकी बात नहीं सुनेगी तो कोर्ट सुनेगी उनकी बात। सुनेगी और न्याय देगी। और इस कुर्सी पर बैठे मेरे जैसे हर आदमी का ये कर्तव्य बनता है कि वो इस भरोसे को न टूटने दे।
 
निश्चित ही ये दृश्य रोंगटे खड़े करने वाला और अभिमानित करने वाला है तथा जिसमें हमें गर्व होता है अपने देश पर, संविधान पर, न्यायपालिका पर। हमें गर्व होता है कि हम इस देश के नागरिक हैं, जहां आज भी कानून के प्रति सर्वोच्च सम्मान है।
 
कानून व्यवस्था अथवा न्याय व्यवस्था किसी भी देश में नागरिकों की सुरक्षा व अनुशासन हेतु एक नियमावली बनाती है एवं उसके सफल संपादन हेतु अलग-अलग विभाग बनाए जाते हैं, जैसे पुलिस विभाग और न्यायालय। पुलिस विभाग का काम होता है अपराधों पर नियंत्रण रखना एवं नागरिकों को भयहीन एवं सुरक्षित माहौल प्रदान करना। कुछ विवाद अथवा अपराध पुलिस के निर्धारण क्षेत्र से ऊपर होकर न्यायालय में जाते हैं और न्यायालयों में इन विवादों का कानूनी प्रक्रियायों से समाधान होता है।
 
हमारे यहां इन दोनों व्यवस्थाओं को लेकर नागरिकों के मन में कई विरोधाभास हैं, कुछ विसंगतियां हैं। कभी कार्यप्रणाली को लेकर, कभी क्षमताओं को लेकर, कभी काम करने के तरीके को लेकर, कभी काम करने की इच्छा को लेकर- कई सारे प्रश्न हैं, जो कि नागरिकों के मन में रहते हैं।
 
आज हम ये समझते हैं कि क्या अंकशास्त्र या रंगशास्त्र से इन सवालों का, इन विसंगतियों का, इन विरोधाभासों का निराकरण संभव है? और इन शास्त्रों के प्रयोग से क्या हम एक बेहतर नागरिक व्यवस्था और एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं? और भारत की प्रगति में क्या योगदान कर सकते हैं?
 
पुलिस विभाग खाकी रंग के अलग-अलग शेड की यूनिफॉर्म का प्रयोग करते हैं एवं न्यायपालिका में वकील एवं जज काले कोट एवं उसके अंदर सफेद शर्ट का प्रयोग करते हैं। ये समझना आवश्यक है कि ये रंग इस कार्यप्रणाली हेतु वाकई उपयुक्त है या नहीं?

रंगशास्त्र के अनुसार खाकी रंग कोई बहुत उपयोगी या अच्छा रंग नहीं है, वरन निष्क्रिय एवं नेगेटिव रंग है।
विकसित राष्ट्रों का अगर उदाहरण लिया जाए, जैसे अमेरिका, यूरोप, कनाडा, कोरिया, सिंगापुर इत्यादि तो हम ये पाएंगे कि वहां पुलिस और जज इत्यादि ऊपर के वस्त्रों में नीले रंग का प्रयोग ज्यादा करते हैं।
 
इन देशों में हम ये भी देख सकते हैं कि पुलिस और न्यायपालिका का नागरिकों के साथ व्यवहार सौहार्दपूर्ण है एवं पुलिस और न्यायपालिका के सदस्य जहां खुशमिजाज पाए जाते हैं, वहीं वे अपने निजी जीवन में भी संतुष्ट और तनावरहित रहते हैं। जहां वे अपने कार्यों के प्रति पूर्ण श्रद्धा से समर्पित पाए जाते हैं, वहीं वे अपराधियों के लिए अत्यंत खूंखार और कठोर हैं। वे मानवीय पहलू रखते हुए नागरिकों से अच्छा व्यवहार करते हुए पाए जाते हैं।
 
नीला रंग (नेवी ब्लू, डार्क नेवी ब्लू) शनि का रंग है और शनिदेव न्याय के देवता हैं। अत: अगर रंगशास्त्र के अनुसार देखा जाए तो नीले रंग की यूनिफॉर्म भारत के पुलिस विभाग हेतु सबसे उत्तम है। सिर्फ इस रंग परिवर्तन से हम ये पा सकते हैं कि पुलिस का जनता के प्रति व्यवहार बदल सकता है, रिश्वतखोरी एवं दुर्व्यवहार जैसी समस्यायों से निजात पाई जा सकती है। और सिर्फ यहीं नहीं, पुलिस स्टाफ के निजी जीवन के तनावों में भी कमी आ सकती है और उनका स्वास्थ्य बेहतर रह सकता है। यहीं बात न्यायपालिका के वकीलों और जजों पर भी लागू होता है।

काला रंग खुशी का रंग नहीं है एवं ये मानसिक तनाव एवं अंदर चल रहे परस्पर विरोध को दर्शाता है। काला रंग व्यक्ति को निढाल कर देता है एवं तर्कसंगत होने नहीं देता। न्यायपालिका जैसे संवेदनशील स्थान पर भ्रमित करने वाले एवं पूर्ण सफलता के बजाय आंशिक सफलता देने वाले रंग के प्रभाव अत्यंत नुकसानदायक हो सकते है। क्यों व्यक्ति न्यायपालिका के पास आने के बजाय अलग समाज की पंचायत या शरीयत के पास जाकर अपने मामले सुलझाना चाहता है- ये चिंता का विषय है।
 
एक विचार यह भी है कि देरी से मिला न्याय महत्व का नहीं होता है। समय पर मिले न्याय से ही व्यक्ति की समस्या का हल एवं न्याय के प्रति सम्मान हो सकता है। नीले रंग के उपयोग से कई सारे लंबित मामलों में त्वरित एवं उचित निराकरण पाया जा सकता है। उचित एवं वक्त पर प्राप्त न्याय से नागरिकों में उचित संतोष रहेगा और देश व समाज को उचित प्रगति प्राप्त हो सकती है।
 
व्यक्तिगत तौर पर कई सारे मिलने आने वाले पुलिस साथी एवं वकील व जज साथियों पर हम ये आजमा चुके हैं। उनसे ऊपर की जेब में नीला रूमाल रखने मात्र से उन्हें काफी राहत महसूस हुई है। अत: सुझावित है कि भारत में भी पुलिस एवं न्यायपालिका के यूनिफॉर्म में नीले रंग का प्रयोग हो।
 
जापान और कई सारे यूरोपीय देशों में यह प्रयोग किया गया है, जो कि काफी सफल रहा है कि जेलों और उन क्षेत्रों में जहां अपराध ज्यादा होते हैं अथवा अपराधियों की संख्या ज्यादा होती है, वहां पर नीले रंग व नीली रोशनी का प्रयोग अधिक किया गया।
 
नीला रंग मानसिक तरंगों को प्रभावित करता है एवं व्यक्ति को शांत चित अवस्था की ओर ले जाता है जिससे कि आपराधिक प्रवृत्ति में कमी आती है। जेलों में भी नीला रंग करने एवं नीली रोशनी के प्रयोग से देखा गया कि क्रूरतम अपराधी भी शांत स्वभाव के बन गए। अत: नीले रंग का प्रयोग भी सुझावित है।

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