अनिल त्रिवेदी (एडवोकेट)

लेखक वरिष्ठ अभिभाषक हैं
दुनिया के लोगों के मन आज भय से व्याकुल हैं। दुनियाभर की राजकाज की व्यवस्थाओं, समाजों और मनुष्यों के मन में जो चिंता और...
लॉकडाउन को हम जीवनरक्षा की समझ का खुला विश्वविद्यालय भी मान सकते हैं। इससे पहले किसी महामारी से सारी दुनिया का इतना...
आज से करीब 30 साल पहले स्वाधीनता संग्राम और समाजवादी आन्दोलन के अग्रणी मामा बालेश्वरदयाल से एक शाम उनकी बामनिया स्थित...
लोग यानी खालिस मनुष्य।लोग यानी जिनकी विशिष्ठ या अलग पहचान नहीं।लोग भीड़ नहीं, जीवन की सनातन पहचान होतेहैं।लोगों से...
भारत का संविधान भारत के नागरिकों के कल्याण के लिए वचनबद्ध है। राज्य के सारे कार्यकलाप और नीतियां नागरिकों के लिए लोकमैत्रीपूर्ण...
युद्धशास्त्र का यह सामान्य सिद्धांत है कि हमलावर को परास्त करने के लिए जिन पर हमला होता है, उन सबको पूरी एकाग्रता से...
हिन्दी के प्रसिद्ध कवि रामकुमार चतुर्वेदी ‘चंचल’ की एक पुरानी कविता की पंक्ति है- ‘मैं सुलगते प्रश्नवाचक चिन्ह सा...
भारत जैसे विशाल भू-भाग वाले देश में आज के काल में भी छोटी-मोटी मनुष्य बसाहटों में स्थानीय स्तर पर सतत रोजगार की उपलब्धता...
मनुष्य एक ऐसा जीव है जिसे सहज मनुष्य रहकर ही जीवन जीते रहने में संतोष नहीं है। प्रत्येक मनुष्य में अपनी निजी विशेषता...
31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के करमसद ग्राम में एक निर्धन परिवार में सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म हुआ था। उनके पिता झवेर भाई...
संत विनोबा भावे का मानना था कि आज हमारे सामने भूखा भगवान खड़ा है। वह भगवान ऐसा है, जो खुद दूध दुहता है, पर उसे वह पीने को...
इस जगत में जन्म और मृत्यु का सनातन प्राकृतिक क्रम है। जो जन्मा है, वह जाएगा ही यह बात अटल सत्य होने के बाद भी मृत्यु के...