ऋतुपर्ण दवे

हकीकत भी यही है कि ‘दुनिया मेरी मुट्ठी में’ का असल सपना Internet ने ही पूरा किया। लेकिन अब बड़ा सच यह भी है कि इस सेवा का जरिया...
दुनिया के कई देशों में पहले ही कोरोना की दूसरी और कहीं-कहीं इसके बाद की भी लहरें दिखने लगी हैं। भारत में भी विशेषज्ञ...
16 फरवरी की अल सुबह सवारियों से भरी तेज रफ्तार बस द्वारा नहर पर ही ट्रक को ओवरटेक करने की जल्दी में जरा सा संतुलन बिगड़ा...
अब इसे त्रासदी कहें या हादसा या फिर आप बुलाई आपदा जो भी, लेकिन सच यही है कि 2013 में भी इसी उत्तराखण्ड की केदरानाथ त्रासदी...
म प्रकृति को इतना मजबूर करते जा रहे हैं कि कहीं उसकी नेमत मजबूर हो बद्दुआ में न बदलने लगे. इशारों को भी समझने की कोशिश...
इस सब्सिडी के खत्म होने से लोकसभा सचिवालय को हर साल लगभग 8 से 10 करोड़ रुपये की बचत होगी। निश्चित रूप से तमाम सुविधाभोगी...
श्मशान में भी बेशर्म भ्रष्टाचार! सुनने में थोड़ा अजीब लगता है लेकिन हकीकत यही है। इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहेंगे...
साल भर में ही कोरोना के नए-नए रूप और प्रकार भी सामने आने लगे हैं। लोगों के सामने कोविड के असर, नए आकार-प्रकार और प्रभाव...
बदले हुए परिवेश (सामाजिक व राजनीतिक दोनों) में वाकई किसानों की हैसियत और रुतबा घटा है। किसान अन्नदाता जरूर है लेकिन...
अब वजह कुछ भी हो, लेकिन किसानों की एकता ने देश में इस आन्दोलन को एक नया मंच और नई चेतना जरूर दे दी है। स्थिति कुल मिलाकर...
चीन खुश होगा उसका भूतिया नाम दुनिया में गूंज रहा है, विश्व रिकॉर्ड बन लिया है। भले ही चीन इसे अपनी उपलब्धि कह ले लेकिन...
राजनीतिक पंडितों की नजर सबसे ज्यादा मप्र के उपचुनावों पर है क्योंकि सत्ता की सीढ़ी का नया रास्ता निकालने की तकरीब देश...
टीवी कार्यक्रमों की गुणवत्ता पर उंगलियां तो काफी पहले से उठ रहीं थीं लेकिन हाल के टीआरपी घोटाले के बाद यह साफ हो गया...
खेती के अपशिष्ट से बनने वाली यह प्लाई आज बाजार में उपलब्‍ध सभी प्लाई से न केवल चार गुना ज्यादा मजबूत होगी बल्कि सस्ती...
लोग खुद-ब-खुद ऐसे सब्जबाग की गिरफ्त में आ जाते हैं। अभिभावक भ्रमित हो वही मान बैठता है जो कॉर्पोरेटर बना नयी विधा का...
खैर बापू तुझे पता है कितने नामी हीरो-हीरोइन सुट्टा के चक्कर में घनचक्कर बने हुए हैं। सीबीआई, एनसीबी, पुलिस और न जाने...
चुनावी रणनीति में उनका यह कॉन्फीडेंस और तरीका ही था जो वह अक्सर विरोधियों को शिकस्त दे देते थे
नया संसद भवन समय के साथ प्रासंगिक है। हो भी क्यों न जब 2026 में संसदीय क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन होगा
दवाई से ज्यादा बचाव का सदियों पुराना तरीका और दादी के नुस्खे कोरोना काल में भी कारगर होते दिख रहे है।
इसका मतलब यह नहीं कि जो दुनिया का हाल है वही हमारा रहे और चुप बैठ जाएं।