पुष्पा परजिया

तू तो रही है सदा से आरजू मेरी मेरी भारत माता तू तो बसी है मेरे मन में पर क्या करूं यहां से तुझे न देखा जाता
सुंदर, नाजुक, कोमल-कोमल, मानो कोई खिली थी नन्ही-सी कली, देख-देख मैं मन ही मन खुश होती लहराती मेरे मन की बगिया
जीवन ज्योत जल जाती मानो तेरे आने से, लोग मुस्कुराते थे मेरे इतराने से
सुंदर, नाजुक, कोमल-कोमल मानो कोई खिली थी नन्ही-सी कली देख-देख मैं मन ही मन खुश होती लहराती मेरे मन की बगिया
आई खिचारहाई कहीं देश के एक कोने में कहते लोग इसे खिचारहाई, कहीं कहते मकर संक्रांति तो कहीं पतंगबाजी के लिए होती इसमें...
दिन ढला हो गई रात लो आई सुबह नई वक्त सदा चलता ही रहता बिना कोई विश्राम लिए
नारी तू नारायणी चलता तुझसे ही संसार है। है नाजुक और सुंदर तू कितनी तुझमें ओजस्विता और सहजता का श्रृंगार है
आई खिचारहाई कहीं देश के एक कोने में कहते लोग इसे खिचारहाई, कहीं कहते मकर संक्रांति तो कहीं पतंगबाजी के लिए होती इसमें...
रह गए हैं अब कुछ पल, इस साल के अंत के, होने वाली है नई सुबह, सपनों के संसार की।
काले घिरे से बादलों को, हवा के तूफानों ने जुदा किया। जो बरसने को थे तैयार उन्हें, आंधी के थपेड़ों ने सुखा दिया।
चल पड़े थे कई विचारों के मंथन संग, बह गए थे अनजान एक बहाव से हम। न आसमां दिख रहा, न जमीं दिख रही थी, न ही एहसास कोई, न ही मन में...
दुनिया के तमाम देशों में बसे सभी हिन्दुस्तानी भाई-बहनों को दीपावली की अनेकानेक शुभकामनाएं। आने वाला नया वर्ष आप सबके...
बात आज की नहीं न जाने कितने दशक पुरानी है, दुश्मन चीन की फितरत में तो भरी हुई बेईमानी है। कहते थे बरसों पहले तुम हैं हिन्दी-चीनी...
लबों पर आ गए अल्फ़ाज़ दरिया की मौजें देखकर ख़याल थे विशाल समंदर की गहराइयों की तरह ऐसा लगा कि पहुंच गए हम अगले जनम तक और लम्बी...
न उलझ जाऊं इस जहां के आडंबरों में, जब हो कभी मन की चंचलता, न कर बैठूं कोई अपराध जब मन की हो अधीरता। न जाऊं आड़े-टेढ़े रास्तों...
एक अनजान राह पर चल पड़े मुसाफिर, चलना था, बस चलना ही था इस राह पर। आगे क्या होने वाला है, ये पता नहीं था, अपने सब हैं, साथ...
हर एक लम्हा आए याद उस दिन का, जब आई मेरी नन्ही परी। सुन्दर, नाजुक, कोमल-कोमल मानो कोई खिली थी नन्ही-सी कली, देख-देख मैं मन...
हर साल मई माह के दूसरे रविवार को दुनिया भर में मदर्स डे यानि मातृ दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस सुअवसर पर हम मां के...
करते हैं रुखसत जमाने से जनाजे को कंधा दे देना आए थे खामोशी के संग जाते भी हैं खामोशी के संग यादें लिए और दिए जाते हैं...
दर्द ने बहुत दर्द दिया है हमको, अपनों ने दर्द का अर्थ समझा दिया है हमको। नादां थे न समझ सके थे बेवफाइयां उनकी, करते रहे...