बिहार चुनाव : मुजफ्फरपुर में रमई को 9वीं जीत की आस, दांव पर शर्मा की प्रतिष्ठा

बुधवार, 4 नवंबर 2020 (15:55 IST)
पटना। बिहार में तीसरे चरण में 7 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में मुजफ्फरपुर जिले की बोचहा (सुरक्षित) सीट से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कद्दावर नेता और पूर्व परिवहन मंत्री रमई राम नौवीं बार जीत अपने नाम करने की जुगत में हैं, वहीं मुजफ्फरपुर सीट से सूबे के नगर विकास एवं आवास मंत्री और भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार सुरेश कुमार शर्मा की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है।

शाही लीची के लिए मशहूर मुजफ्फरपुर जिले की 11 विधानसभा सीट में से छह सीट गायघाट, औराई, बोचहा (सु), सकरा, कुढ़नी और मुजफ्फरपुर सीट पर तीसरे चरण के तहत सात नवंबर को मतदान होना है वहीं जिले की अन्य पांच सीट मीनापुर, कांटी, बरूराज, पारु, साहिबगंज पर दूसरे चरण के तहत तीन नवंबर को मतदान हो चुका है।

बोचहा (सुरक्षित) सीट से आठ बार जीत का सेहरा अपने नाम कर चुके राजद के दिग्गज नेता रमई राम चुनावी रणभूमि में उतरे हैं और उनके सामने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दल विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) उम्मीदवार पूर्व विधायक मुसाफिर पासवान रमई राम के सामने चुनौती बनकर खड़े हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अमर प्रसाद मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में लगे हैं।

वर्ष 2015 में निर्दलीय प्रत्याशी बेबी कुमारी ने राजद के रमई राम को 24130 मतों से पराजित कर सभी को चौंका दिया था। बाद में बेबी कुमारी भाजपा में शामिल हो गईं। वर्ष 2015 में दिवंगत रामविलास पासवान के दामाद अनिल कुमार साधु भी लोजपा के टिकट पर चुनावी समर में उतरे थे हालांकि उन्हें चौथे स्थान पर संतोष करना पड़ा भाजपा से टिकट मिलने से नाराज बेबी कुमारी ने बगावत कर लोजपा से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी लेकिन भाजपा के शीर्ष नेताओं के समझाने के बाद उन्होंने अब भाजपा में ही अपनी आस्था जताई है।

बोचहा सुरक्षित सीट से वर्ष 1972 में रमई राम ने इस क्षेत्र से पहली बार चुनाव जीता था। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1980,1985,1990,1995, 2000, फरवरी 2005 और अक्टूबर 2005, वर्ष 2000 में चुनाव जीता। हालांकि वर्ष 1977 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस बार के चुनाव में 14 प्रत्याशी चुनावी रण में उतरे हैं लेकिन मुख्य मुकाबला राजद के राम और वीआईपी प्रत्याशी पासवान के बीच माना जा रहा है। दलित महादलित बहुल इस क्षेत्र में अब तक भूमिहार, निषाद, यादव और राजपूत जाति के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं।

उर्वर भूमि और स्वादिष्ट फलों के लिए देश-विदेश में ‘स्वीटसिटी’ के नाम से मशहूर मुजफ्फरपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा को मैदान में उतारा है। उनके सामने चार बार विधायक रहे विजेन्द्र चौधरी कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। इस चुनाव में वैसे तो 28 उम्मीदवार मैदान में हैं लेकिन मंत्री एवं पूर्व विधायक के बीच सीधी लड़ाई है। प्लूरल्स पार्टी की उम्मीदवार डॉ. पल्लवी सिन्हा भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी को चुनौती पेश कर रही हैं।

वर्ष 2015 में भाजपा के शर्मा ने जदयू के विजेन्द्र चौधरी को 29739 मतों से पराजित किया था। विजेन्द्र चौधरी ने वर्ष 1995, वर्ष 2000, वर्ष 2005 फरवरी और अक्टूबर 2005 में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। वहीं भाजपा के शर्मा वर्ष 2010 और वर्ष 2015 में इस सीट पर निर्वाचित हुए हैं।मुजफ्फरपुर कपड़ा मंडी, लाह की चूड़ियों, शहद तथा आम और लीची जैसे फलों के उम्दा उत्पादन के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है, खासकर यहां की शाही लीची का कोई जोड़ नहीं है। मुजफ्फरपुर थर्मल पावर प्लांट देशभर के सबसे महत्वपूर्ण बिजली उत्पादन केंद्रों में से एक है।

गायघाट विधानसभा सीट से निवर्तमान विधायक महेश्वर प्रसाद यादव जदयू के टिकट पर पांचवीं बार विधायकी का ताज अपने नाम करने के लिए चुनावी अखाड़े में दम भर रहे हैं और उन्हें टक्कर देने के लिए महागठबंधन ने राजद के नए सिपाही निरंजन राय को उतारा है। वैशाली की सांसद वीणा देवी और विधान पार्षद दिनेश सिंह की पुत्री कोमल सिंह लोजपा के टिकट पर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में लगी हैं। इस सीट पर कुल 31 प्रत्याशी चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं।

वर्ष 2015 में राजद के महेश्वर प्रसाद यादव ने भाजपा की वीणा देवी को 3501 मतों के अंतर से पराजित किया था। यादव ने वर्ष 1990 के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1995 में जनता दल, फरवरी एवं अक्टूबर 2005 और वर्ष 2015 में राजद के टिकट पर जीत हासिल की। इस बार के चुनाव में महेश्वर प्रसाद यादव ने राजद का साथ छोड़ जदयू का हाथ पकड़ लिया है।

‘माटी की मूर्ति’ ‘कैदी की पत्नी’ ‘जंजीरें और दीवारें’ तथा 'गेहूं और गुलाब' जैसी चर्चित साहित्यिक रचना के महान लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी की धरती औराई विधानसभा सीट से भाजपा ने रामसूरत राय को चुनावी रणभूमि में उतारा है। महागठबंधन में तालमेल के तहत यह सीट भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवाद (भाकपा-माले) के कब्जे में चली गई।भाकपा माले की टिकट पर मोहम्मद आफताब आलम चुनावी समर में डटे हैं, वहीं इस सीट से निवर्तमान राजद विधायक सुरेन्द्र कुमार टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में बाजी खेल रहे हैं। वर्ष 2015 में राजद के सुरेन्द्र कुमार ने भाजपा के राम सूरत राय को 10825 मतों से शिकस्त दी थी।

औराई विधानसभा सीट पर लंबे समय तक समाजवादी नेता गणेश यादव का दबदबा रहा था। वे 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर पहली बार विधायक बने। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1980, 1985, 1990, 1995 और 2000 में भी इस क्षेत्र पर कब्जा जमाया। औराई क्षेत्र की सियासी पिच पर सिक्सर लगा चुके गणेश प्रसाद यादव के विजय रथ को फरवरी 2005 में पूर्व सांसद जदयू के अर्जुन राय ने ब्रेक लगाई। गणेश यादव के पिता पांडव राय ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी वर्ष 1962 में जीत दर्ज की है। इस बार के चुनाव में औराई सीट पर 15 प्रत्याशी चुनावी रण में उतरे हैं।

सकरा सीट से जदयू की टिकट पर कांटी के निवर्तमान विधायक अशोक कुमार चौधरी ताल ठोक रहे हैं। कांग्रेस के उमेश कुमार राम और पूर्व मंत्री रमई राम की पुत्री गीता कुमारी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) उनकी जीत की राह में अवरोध लगाने की कोशिश में लगी है। लोजपा के संजय पासवान मुकाबले को चतुष्कोणीय बनाने के प्रयास में हैं।वर्ष 2015 में राजद के लाल बाबू राम ने भाजपा के अर्जुन राम को 13012 मतों के अंतर से मात दी थी।

महागठबंधन में सीटों के तालमेल के तहत यह सीट कांग्रेस के पाले में चली गई और राजद के निवर्तमान विधायक लाल बाबू राम टिकट से वंचित रह गए। इस सीट पर 11 प्रत्याशी चुनावी रण में किस्मत आजमा रहे हैं।
कुढनी सीट से भाजपा ने अपने निवर्तमान विधायक केदार प्रसाद गुप्ता पर भरोसा जताते हुए उन्हें पार्टी का उम्मीदवार बनाया है।
राजद के टिकट पर पूर्व राज्यसभा अनिल कुमार सहनी चुनावी मैदान में डटे हैं। अनिल कुमार सहनी के पिता महेन्द्र सहनी भी राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2015 में भाजपा के गुप्ता ने जदयू के मनोज कुमार सिंह को 11570 मतों के अंतर से पराजित किया। इस सीट पर 19 प्रत्याशी चुनावी रणभूमि में भाग्य आजमा रहे हैं।(वार्ता)

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