आर्या ने सुष्मिता सेन को दी वो पहचान, जिसकी थी उन्हें तलाश

समय ताम्रकर

गुरुवार, 2 जुलाई 2020 (06:45 IST)
वेबसीरिज के शौकीनों के बीच इन दिनों आर्या की चर्चा है। आम हो या खास, सभी इसे पसंद कर रहे हैं। सलमान ने तो वीडियो जारी कर इसकी प्रशंसा की है। कंटेंट के साथ-साथ सुष्मिता सेन के अभिनय कारण यह सीरिज पसंद की जा रही है। अक्सर बॉलीवुड में कमबैक की चर्चा होती है और इस लिहाज से सुष्मिता सेन का यह एक जोरदार कमबैक है। वे एक भूखी शेरनी की तरह नजर आई जिसे जैसे ही दमदार रोल मिला उसने अपना दम दिखा दिया। 
 
आर्या में सुष्मिता की भूमिका भी कुछ इसी तरह की है। वे एक ऐसी पत्नी के रोल में हैं जिसके पति की गोली मार कर हत्या कर दी जाती है। एक माफिया 100 करोड़ रुपये उससे मांगता है। जब वह पति का बिज़नेस संभालती है तो पता चलता है कि फैक्ट्री में अवैध काम होते हैं। उसके बच्चों को मारने की धमकी मिलती है। वह निडर होकर तमाम परिस्थितियों का मुकाबला एक शेरनी की भांति करती है। 
 

 
सुष्मिता सेन की आखिरी रिलीज फिल्म 'नो प्रॉब्लम' दस साल पहले 2010 में आई थी। इसके बाद उन्होंने फिल्मों से इसलिए तौबा कर ली क्योंकि ढंग के रोल नहीं मिल रहे थे। वैसे भी खूबसूरत अभिनेत्रियों को हिंदी फिल्मों में ग्लैमर डॉल की तरह प्रस्तुत किया जाता है ताकि दर्शकों की आंखों को सुकून मिले। 
 
बड़े सितारों के साथ महत्वहीन रोल में वे नजर आईं। उनकी शख्सियत इतनी भारी है कि संभवत: बड़े सितारों ने भी उनके साथ काम करना पसंद नहीं किया। उन्हें भय सताता था कि वे सुष्मिता के आगे दब जाएंगे। सुष्मिता ब्यूटी विद ब्रेन रहीं और उन्होंने एक मकाम पर आकर फैसला ले लिया कि अब ऐसी फिल्में नहीं करेंगी। 
 

 
वैसे सुष्मिता ने अपने अभिनय से कभी प्रभावित नहीं किया। लेकिन 'आर्या' में उन्होंने दिखाया कि वे बेहतरीन अभिनय करना जानती हैं। शायद बॉलीवुड ही सुष्मिता की प्रतिभा के साथ न्याय नहीं कर पाया। उन्हें दोयम दर्जे की भूमिका देते आया जिसे सुष्मिता ने अनमने ढंग से निभाया। 
 
सुष्मिता हमेशा स्पष्ट विचारधारा वाली महिला रही हैं। जब वे मिस यूनिवर्स बनीं तो फिल्म निर्माताओं में उन्हें साइन करने की होड़ मच गई। महेश भट्ट ने उन्हें 'दस्तक' फिल्म का ऑफर दिया तो सुष्मिता ने साफ कह दिया कि उन्हें एक्टिंग नहीं आती। इस पर भट्ट ने जवाब  दिया कि इसकी चिंता आप छोड़ दो, वो मैं करवा लूंगा। दस्तक असफल रही और सुष्मिता का करियर रफ्तार नहीं पकड़ पाया। 
 
 
उनकी खुली लाइफस्टाइल का असर भी उनके करियर पर पड़ा। सुष्मिता ने कभी अपने प्रेम-प्रसंगों को नहीं छिपाया। बेबाकी से अपने विचार रखे। बच्चों को गोद लिया। आज से 20-25 साल पहले दर्शक इस तरह की अभिनेत्रियों को स्वीकारने में हिचकते थे। निर्माता-निर्देशक भी दूर भागते थे। इसका खामियाजा सुष्मिता ने भुगता, लेकिन कभी समझौता नहीं किया। 
 

 
आज भी वे अपनी विचारधारा को लेकर स्पष्ट हैं। ऐसे कलाकारों और लोगों को अब स्वीकारा जाने लगा है और ओटीटी प्लेटफॉर्म इनके लिए वरदान साबित हुए हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि सुष्मिता अब लगतार देखने को मिलती रहेंगी।  

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