भारत के 10 खास चिड़ियाघर

गुरुवार, 11 दिसंबर 2014 (07:11 IST)
संकलन : अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'

चिड़ियाघर को शुद्ध हिन्दी में पशु वाटिका, प्राणी उद्यान और अंग्रेजी में जू (zoo) कहा जाता है, लेकिन भारत के अधिकतर चिड़ियाघर महज पशुओं की जेल बनकर रह गए हैं। कुछ खास जंगली पशुओं और पक्षियों से भरे पार्क को चिड़ियाघर कहा जाता है। भारत में हर बड़े शहरों में एक चिड़ियाघर होता है।


चिड़ियाघर को पहले दुर्लभ पशु और पक्षियों के संरक्षण और उन पर शोध के लिए बनाया गया था लेकिन अब ये मनोरंजन के केंद्र बन गए हैं। ठीक है यह पैसा कमाने और मनोरंजन का केंद्र हो, लेकिन यहां पर‍ स्थित प्राणियों की हालत तिहाड़ जेल में बंद लोगों से भी कहीं ज्यादा बदतर है। पशु संरक्षण के नाम पर पशुओं को पिंजरे में बंद कर उन्हें लोगों के मनोरंजन का साधन बना दिया गया है।

भारत को छोड़कर दुनिया के अन्य चिड़ियाघरों का क्षेत्रफल भी ज्यादा है और वहां पर पशुओं के संरक्षण के प्रति सरकार भी गंभीर है। वहां के चिड़ियाघर में पशु मानसिक रूप से स्वस्थ हैं जबकि भारत के चिड़ियाघरों के पिंजरों में बंद शेर, भालू, हिरण आदि मानसिक रूप से बीमार होते जा रहे हैं। खैर... आओ जानते हैं भारत के 10 प्रमुख चिड़ियाघरों के बारे में, जहां आप भी जाकर अपना मनोरंजन कर सकते हैं।

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चेन्नई का अरिनगर अन्ना जुलॉजिकल पार्क : इसे पहले मद्रास जू के नाम से जाना जाता था, इसके बाद इसका नाम बदलकर तमिल नेता अरिनगर अन्ना के नाम पर कर दिया गया। भारत के दक्षिण भारत में स्थित चेन्नई का अरिनगर अन्ना जुलॉजिकल पार्क सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध चिड़ियाघर है, जो लगभग 1300 एकड़ में फैला हुआ है। यह भारत का सबसे बड़ा चिड़ियाघर है।

इसे देश का पहला पब्लिक जू भी कहा जाता है। इसकी शुरुआत 1855 में हुई थी। इस चिड़ियाघर में 1500 से ज्यादा पशु-पक्षियों की प्रजातियां मौजूद हैं। इसके साथ ही 2,553 प्रजातियों के पेड़-पौधों से भी यह चिड़ियाघर महक रहा है।

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दिल्ली का चिड़ियाघर : एशिया के सबसे अच्छे चिड़ियाघरों में एक है दिल्ली के पुराने किले के पास स्थित दिल्ली का चिड़ियाघर। इस चिड़ियाघर को 1959 में बनाया गया था जिसका डिजाइन श्रीलंका के मेजर वाइनमेन और पश्चिम जर्मनी के कार्ल हेगलबेक ने बनाया था।

इस चिड़ियाघर में एक पुस्तकालय है, जहां से पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों के बारे में जानकारी ली जा सकती है। उल्लेखनीय है कि इसी चिड़ियाघर में एक सफेद बाघ ने एक युवक की जान ले ली थी।

214 एकड़ में फैले इस जैविक उद्यान में जानवरों और पक्षियों की 22,000 प्रजातियां और 200 प्रकार के पेड़ हैं। यहां पर ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, अमेरिका और एशिया से लाए गए पशु-पक्षी भी देखे जा सकते हैं।

चिड़ियाघर को देखने का समय : सर्दियों में यह चिड़ियाघर सुबह 9 से शाम 5 बजे तक खुला रहता है जबकि गर्मियों में सुबह 8 से शाम 6 बजे तक खुला रहता है। शुक्रवार को यह बंद रहता है।

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मैसूर का चिड़ियाघर : कर्नाटक के मैसूर में विश्व के सबसे पुराने चिड़ियाघरों में से एक चिड़ियाघर है जिसकी स्थापना 1892 में शाही संरक्षण में हुई थी।

इस चिड़ियाघर में 40 से भी ज्यादा देशों से लाए गए जानवरों को रखा गया है। यहां हाथी, सफेद मोर, दरियाई घोड़े, गैंडे और गोरिल्ला के अलावा देश-विदेश की कई प्रजातियां हैं। इसके अलावा यहां  भारतीय और विदेशी पेड़ों की करीब 85 से अधिक प्रजातियां रखी गई हैं। इस चिड़ियाघर में करंजी झील है, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं।

अगले पन्ने पर चौथा चिड़ियाघर...

हैदराबाद चिड़ियाघर : इसे नेहरू जियोलॉजिकल पार्क कहा जाता है, जो विश्‍वस्तर का चिड़ियाघर है। यह भारतीय राज्य आंध्रप्रदेश के हैदराबाद शहर में स्थित है। 380 एकड़ में फैले इस चिड़ियाघर की स्थापना 1963 में हुई थी।  

इस उद्यान में एक विशालकाय झील भी है। हैदराबाद में दुर्लभ प्रजाति के शेर दिखते हैं। इसके अलावा यहां कई दूसरे देशों से लाए गए पशु और पक्षियों की भरमार है। यहां पर्यटक खुद के वाहन से भी घूम सकते हैं। कई एकड़ में फैले इस उद्यान की खूबसूरती देखते ही बनती है।

हैदराबाद में ही हुसैन सागर झील के दक्षिण में लुंबनी बाग भी स्थित है। हैदराबाद में बहुत सारे बाग हैं, लेकिन लुम्बनी बाग इन बागों में बेमिसाल है। बाग में पर्यटक कई तरह के पौधे भी देख सकते हैं। यहां बच्चों के मनोरंजन के लिए भी बहुत कुछ है।

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त्रिवेंद्रम चिड़ियाघर : केरल के तिरुवनंतपुरम में त्रिवेंद्रम जू है, जहां की प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है। पीएमजी जंक्शन के पास स्थित यह चिड़ियाघर भारत का दूसरा सबसे पुराना चिड़ियाघर है। 55 एकड़ में फैला यह जैविक उद्यान वनस्पति उद्यान का हिस्सा है। इसका निर्माण 1857 ई. में त्रावणकोर के महाराजा द्वारा बनाए गए संग्रहालय के एक भाग के रूप में हुआ था।

यहां अफ्रीकन मूल के शेर भी हैं। इसके अलावा मेंड्रिल बंदर व विदेशी पक्षी भी हैं। यहां देशी-विदेशी वनस्पति और जंतुओं का संग्रह है। इस चिड़ियाघर में नीलगिरि लंगूर, भारतीय गैंडा, एशियाई शेर और रॉयल बंगाल टाइगर भी आपको दिख जाएंगे।

देखने का समय : सुबह 10 से शाम 5 बजे तक और सोमवार को यह जू बंद रहता है।

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असम का चिड़ियाघर : गुवाहाटी स्थित असम राज्य चिड़ियाघर की स्थापना 1957 में हुई थी। यह पूर्वात्तर राज्य का सबसे बड़ा चिड़ियाघर है, जो लगभग 1.75 किलो‍मीटर में फैला है।

यहां रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाटिक लायन, हिमालनीय काला भालू, भारतीय गैंडे के अलावा कई देशी और विदेशी पशु और पक्षी हैं। इसके अलावा इस पार्क में विलुप्तप्राय सूअर पिग्मी हॉग (प्रोक्यूला सालवानिया) का संरक्षण भी किया जा रहा है। पिग्मी हॉग दुनिया में पाया जाने वाला सबसे छोटा जंगली सूअर है।

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नंदनकानन जू : ओडिशा के भुवनेश्वर में 400 हैक्टेयर में फैला नंदनकानन जू विश्वप्रसिद्ध जू है, जो कि एक बॉटनिकल गार्डन भी है। इसे 1979 में आम लोगों के लिए खोल दिया गया था।

कंजिया झील और चंदका-दंपारा वन्यजीव अभयारण्य के हरे-भरे जंगलों के बीच स्थित नंदनकानन जू की प्राकृतिक सुंदरता को देखने के लिए हजारों पर्यटक आते हैं।

यहां विभिन्न प्रकार के जंगली जानवर और कुछ दुर्लभ पेड़-पौधों देखे जा सकते हैं। यहां करीब 126 प्रजाति के जानवर रहते हैं जिनका अच्छे से ध्यान रखा जाता है।

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दार्जीलिंग जू : जलपाईगुड़ी के पास दार्जीलिंग एक खूबसूरत शहर है, जहां दाखिल होते ही ऊंचे-ऊंचे हरे-भरे पहाड़ और बीच में रोमांचकारी संकरी सड़क देखने को मिलेगी। दार्जीलिंग में देखने के लिए कई स्थल हैं।

दार्जीलिंग के चिड़ियाघर पद्मजा नायडू जैविक उद्यान को दुनियाभर के प्रतिष्ठित चिड़ियाघरों में शामिल किया गया है। इसे अंतरराष्ट्रीय 'अवॉर्ड द अर्थ हीरोज' का अवॉर्ड भी मिल चुका है।

दार्जीलिंग भारत के राज्य पश्चिम बंगाल का एक नगर है। दार्जीलिंग की दार्जीलिंग हिमालयन रेलवे यूनेस्को की एक विश्व धरोहर है।

यह उद्यान बर्फीले तेंदुए तथा लाल पांडे के प्रजनन कार्यक्रम के लिए प्रसिद्ध है। आप यहां साइबेरियन बाघ तथा तिब्‍‍बतियन भेड़िये को भी देख सकते हैं। 1878 ईस्वी में इस जू की स्थापना की गई थी।

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नैनीताल जू : नैनीताल भारत के उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं क्षेत्र एक प्रमुख पर्यटन नगर है। 38 एच वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत नैनीताल जू को मिनी जू की श्रेणी से उच्चीकृत कर स्माल जू की श्रेणी में रखा गया है। इस जू का नाम गोविंद वल्लभ पंत जू है।

यह जू नैनीताल बस स्टॉप से केवल 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह चिड़ियाघर हिमालयन काले भालू सहित विभिन्न जानवरों जैसे बंदरों, साइबेरियन बाघ, तेंदुए, भेड़िए, पाम सीविट बिल्लियों, रोज रिंग पैराकीटों, सिल्वर तीतर, पहाड़ी लोमड़ी, सांबर, घोरल और भौंकने वाले हिरणों का एक घर है।

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जूनागढ़ जू : गुजरात के जूनागढ़ स्थित जू को सक्करबाग चिड़ियाघर कहा जाता है। इसे वर्ष 1863 में 200 हैक्टेयर क्षेत्र पर स्थापित किया गया था।

इस चिड़ियाघर में एशियाई शेर जैसे जानवरों की कुछ लुप्तप्राय प्रजातियों और नस्लों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। चिड़ियाघर में जानवरों की कई दुर्लभ प्रजातियां हैं, जैसे भारतीय गौर, मलाबार गिलहरी, अफ्रीकन बंदर और हरे तीतर, जो एशियाई शेरों के बदले में मैसूर के चिड़ियाघर से यहां लाए गए थे।

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