हरिद्वार कुंभ में गंगा स्नान व पूजन के 10 फायदे

गंगा के किनारे कुंभ के दिनों में स्नान करना बहुत ही महत्वपूर्ण है। हरिद्वार में वर्ष 2021 कुंभ मेले का आयोजन होने वाला है। कुंभ का आयोजन मुख्य तौर पर फरवरी से अप्रैल के बीच किया जाएगा। कुंभ में शाही स्नान के अलावा भी और कुछ खास तिथियों पर स्नान होते हैं। आओ जानते हैं सभी स्नानों की तारीखें। वैसे अधिकृत रूप से कुंभ मेला मार्च के शाही स्नान से प्रारंभ होगा, परंतु 14 जनवरी से ही स्नान का महत्व प्रारंभ हो चुका हैं।
 
 
1. हिंदुओं के सभी तीर्थ नदियों पर बसे हैं। गंगा नदी हिंदुओं के लिए देवी और माता समान है। इसीलिए हिंदुओं के लिए गंगा स्नान का बहुत महत्व है। 
 
2. गंगा जीवन और मृत्यु दोनों से जुडी़ हुई है इसके बिना हिंदू संस्कार अधूरे हैं। गंगाजल अमृत समान है इसीलिए इसमें स्नान का महत्व है। 
 
3. अनेक पर्वों और उत्सवों का गंगा से सीधा संबंध है कुंभ में मकर संक्राति, मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी, पूर्णिमा, अमावस्या, महाशिवरात्रि और गंगा दशहरा के समय गंगा में स्नान, पूजन, दान एवं दर्शन करना महत्वपूर्ण माना गया है।
 
4. गंगा पूजन एवं स्नान से रिद्धि-सिद्धि, यश-सम्मान की प्राप्ति होती है तथा समस्त पापों का क्षय होता है। गंगाजी के अनेक भक्ति ग्रंथ लिखे गए हैं जिनमें श्रीगंगासहस्रनामस्तोत्रम एवं गंगा आरती बहुत लोकप्रिय हैं।
 
5. मान्यता है कि गंगा पूजन से मांगलिक दोष से ग्रसित जातकों को विशेष लाभ प्राप्त होता है। 
 
6. गंगा स्नान करने से अशुभ ग्रहों का प्रभाव समाप्त होता है। 
 
7. अमावस्या दिन गंगा स्नान और पितरों के निमित्त तर्पण व पिंडदान करने से सद्गती प्राप्त होती है और यही शास्त्रीय विधान भी है।
 
9. हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि कुंभ स्थल के पवित्र जल में स्नान करने से मनुष्य के सारे पाप-कष्ट धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 
 
10. गंगाजी में स्नान करने से सात्विकता और पुण्यलाभ प्राप्त होता है।

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