कविता : ह्यूस्टन में आज मोदी-मोदी

गूंजेगा अब ह्यूस्टन आज मोदी-मोदी के नारों से।
झंकृत होगा विश्व मोदी के ओजपूर्ण विचारों से।।
 
गूंजेगी भारत माता की जय अमेरिका के मंच से।
दस गुना होगी भारी जो हर पाकिस्तानी प्रपंच से।।
370 से उभरी आत्मनिश्वासी हुंकारों से।
POK पर संभावित निर्णायकी प्रहारों से।
गूंजेगा अब ह्यूस्टन आज मोदी-मोदी के नारों से।।1।।

 
130 करोड़ जन-मन का लोकनायक जहां खड़ा होगा।
वह NRI उत्सव हर दीपावली से बड़ा होगा।।
प्रेसीडेंट ट्रंप और सांसदों की गरिमापूर्ण उपस्थिति में,
बड़ा होगा वह त्योहार सभी अमेरिकी त्योहारों से।।
गूंजेगा अब ह्यूस्टन आज मोदी-मोदी के नारों से।।2।।
 
नाज़ है जिस पर हर भारतवंशी को देश में और बाहर ।
हर क्षण देश के लिए जिसका, हर सांस देश पर न्यौछावर।।
क्यों न पलक पांवड़े बिछें उसके स्वागत, अभिनंदन में,
क्यों न हरेक आत्मा से उठे उसके ही जयकारे का स्वर।।
कांपेंगी पड़ोसी की रूह, गगन गूंजेगा जब जयकारों से।।
गूंजेगा अब ह्यूस्टन आज मोदी-मोदी के नारों से।।3।।
 

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