Apple ने 92 देशों के iPhone यूजर्स को जारी की चेतावनी, स्पाइवेयर अटैक को लेकर किया अलर्ट

वेबदुनिया न्यूज डेस्क

गुरुवार, 11 अप्रैल 2024 (17:43 IST)
भारतीय विपक्षी नेताओं ने जताई थी चिंता 
मांगते हैं लाखों की फिरौती 
Apple  पहले भी जारी कर चुका है चेतावनी 
 
Apple warns mercenary spyware attack threat to iPhone : Apple ने भारत सहित दुनिया के 92 देशों के यूजर्स को एक खास खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है। Apple ने इस खतरे को लेकर बुधवार देर रात को नोटिफिकेशन जारी किया। नोटिफिकेशन में Apple ने कहा कि उनके यूजर्स Mercenary Spyware अटैक का शिकार हो सकते हैं। सेलेक्टेड यूजर्स को टारगेट बनाकर इस स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है। Apple ने कहा कि उन्हें 'राज्य-प्रायोजित' हैकरों से उनके iphone तक पहुंचने की कोशिश करने की चेतावनी वाले मैसेज मिले हैं।  
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भारत में विपक्षी नेताओं ने जताई थी चिंता : इससे पहले इसे लेकर भारत ने विपक्षी नेताओं ने भी चिंता जताई थी। अक्टूबर 2023 में कुछ भारतीय सांसदों ने सोशल मीडिया पर Apple की ओर से जारी ऐसे ही ईमेल के स्क्रीन शॉट शेयर किए थे। इसमें कहा गया था, 'Apple का मानना ​​है कि आपको स्टेट स्पॉन्सर (सरकार) अटैक द्वारा टारगेट किया जा रहा है, जो आपके Apple ID से जुड़े iPhone से रिमोटली कॉम्प्रोमाइज करने की कोशिश कर रहे हैं।
 
क्या होते हैं Mercenary Spyware : मर्सिनरी स्पायवेयर अटैकर्स बहुत कम संख्या में कुछ खास लोगों और उनके डिवाइसेज को टारेगट करने के लिए बहुत अधिक संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं। इन स्पाइवेयर अटैक्स की कॉस्ट लाखों डॉलर होती है। उनका पता लगाना और रोकना बहुत कठिन होता है।
 
कैसे करता है स्पायवेयर काम : जब आप किसी किसी अनसेफ वेबसाइट पर जाते हैं, अनजाने में कोई अनसेफ ऐप इंस्टॉल करते हैं, या यहां तक कि कोई फाइल अटैचमेंट भी खोलते हैं। जब स्पायवेयर आपके डिवाइस पर होता है, तो यह डेटा एकत्र करना शुरू कर देता है, जो आपकी वेब एक्टिविट से लेकर स्क्रीन कैप्चर और आपके कीस्ट्रोक्स तक कुछ भी हो सकता है। कैप्चर किया गया डेटा स्पायवेयर क्रिएटर तक पहुंचने के बाद वह इसे या तो सीधे खुद इस्तेमाल करता है या थर्ड पार्टी को बेच देता है। डेटा में क्रेडिट कार्ड और बैंक लॉगिन डिटेल्स भी शामिल हो सकती है।
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पहले भी जारी की थी चेतावनी : आईफोन बनाने वाली कंपनी 2021 से अब तक कई बार इस तरह के हमलों के लेकर यूजर्स को चेतावनी जारी कर चुकी है। एपल अब तक 150 से अधिक देशों के यूजर्स को इस तरह की चेतावनी जारी कर चुकी है।

किन-किन को बनाया जा सकता है निशाना : स्पाइवेयर हमलों की जद में आने वाले लोगों में पत्रकार, कार्यकर्ता, राजनेता और राजनयिक शामिल हैं। एप्पल ने इन हमलों को लेकर जारी एक सूचना में कहा कि अक्सर ऊंची लागत आने की वजह से कम संख्या में ही स्पाइवेयर को तैनात किया जाता है लेकिन भाड़े के स्पाइवेयर से हमले ‘जारी हैं और वैश्विक’ स्तर पर किए जा रहे हैं।
 
60 देशों में हो रहे हैं चुनाव : एप्पल ने 10 अप्रैल को जारी इस खतरे की अधिसूचना में पिछले शोध और रिपोर्टों के आधार पर यह संकेत दिया है कि ऐसे हमलों का ताल्लुक ऐतिहासिक रूप से सरकार से जुड़े पक्षों से रहा है। यह अधिसूचना ऐसे समय आई है जब भारत समेत करीब 60 देशों में इस साल चुनाव होने जा रहे हैं।
 
और क्या कहा कंपनी ने : दिग्गज फोन विनिर्माता ने कहा कि खतरे की सूचनाएं उन उपयोगकर्ताओं को सूचित करने और मदद करने के लिए तैयार की गई हैं, जिन्हें व्यक्तिगत रूप से भाड़े के स्पाइवेयर हमलों से निशाना बनाया गया हो। संभवतः ऐसा इसलिए हो कि वे कौन हैं या क्या करते हैं। ऐसे हमले नियमित साइबर आपराधिक गतिविधियों एवं उपभोक्ता मालवेयर की तुलना में बहुत अधिक जटिल होते हैं क्योंकि भाड़े के स्पाइवेयर से हमला करने वाले बहुत कम संख्या में विशिष्ट व्यक्तियों और उनके फोन को लक्षित करने के लिए असाधारण संसाधनों का उपयोग करते हैं।’’
 
एप्पल ने कहा कि भाड़े के स्पाइवेयर हमलों की कीमत लाखों डॉलर होती है। इसके अलावा हमले की अवधि कम होने से उनका पता लगा पाना और उन्हें रोक पाना खासा मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा अधिकांश उपयोगकर्ताओं पर ऐसे हमले कभी भी नहीं किए जाते हैं।
 
कंपनी ने कहा, ‘‘नागरिक समाज संगठनों, प्रौद्योगिकी फर्मों और पत्रकारों से मिली सूचनाओं और शोध से पता चलता है कि इसपर आने वाली ऊंची लागत और जटिलता को देखते हुए ये हमले ऐतिहासिक रूप से सरकारी पक्षों से जुड़े रहे हैं। इनमें सरकारी की तरफ से भाड़े के स्पाइवेयर विकसित करने वाली निजी कंपनियां भी शामिल हैं जिनमें एनएसओ ग्रुप का स्पाइवेयर पेगासस भी है।’’
 
क्या था प्रतिशत : पिछले वर्ष एक सर्वेक्षण से पता चला था कि दुनियाभर में लगभग 49 प्रतिशत संगठन कर्मचारियों के उपकरणों पर हमले या सुरक्षा उल्लंघन का पता लगाने में असमर्थ हैं। साइबर सुरक्षा फर्म ‘चेक पॉइंट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पिछले छह महीनों में मोबाइल मालवेयर से प्रभावित संगठनों का साप्ताहिक औसत 4.3 प्रतिशत था, जबकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र का औसत 2.6 प्रतिशत था। Edited By : Sudhir Sharma

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