दुधमुंही चंपक और मां के बीच जेल नियमों की दीवार, जमानत के बाद भी नहीं हो पाई रिहाई

विकास सिंह

बुधवार, 1 जनवरी 2020 (21:47 IST)
बनारस की 16 महीने की दुधमुंही चंपक को नए साल का पहला दिन भी बिना मां के गुजारना पड़ा। CAA के विरोध में प्रदर्शन करने पर 19 दिसंबर से जेल में बंद चंपक की मां और पिता को बुधवार को बनारस जिला कोर्ट से जमानत तो मिल गई, लेकिन जेल तक रिहाई के पेपर तय समय तक नहीं पहुंच पाने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो सकी। अब मां एकता की रिहाई गुरुवार सुबह होने की संभावना है।

वेबदुनिया से बातचीत में रवि के बड़े भाई शशिकात तिवारी ने आरोप लगाया कि कोर्ट से जमानत मिल जाने के बाद भी जेल प्रशासन के अंसवेदनशील रवैए के कारण डेढ़ साल की चंपक अपनी मां से नए साल पर नहीं मिल सकी।

वहीं चंपक की मां एकता की रिहाई नहीं होने पर जेल प्रशासन ने जेल के नियमों का हवाला दिया है। जेल प्रशासन के मुताबिक अगर शाम 4.30 बजे तक कागजात पहुंच जाते है तो रिहाई कर दी जाती लेकिन रिहाई के पेपर तय समय के बाद पहुंच पाने के कारण अब गुरुवार सुबह रिहाई होगी।
 
इससे पहले दिन में सेशन कोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रवि और एकता के साथ उन सभी 56 आरोपियों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली जिनको 19 दिसंबर को बेनियाबाग में हुए प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार कर जेल भेज गया था। कोर्ट ने 25-25 हजार के मुचलके पर सभी आरोपियों की रिहाई के आदेश दिए। 
 
प्रियंका गांधी ने साधा निशाना : इससे पहले बुधवार को दिन में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी नें ट्वीट कर चंपक को लेकर भाजपा सरकार पर हमला बोला। प्रियंका ने ट्वीट कर लिखा कि यह सरकार का नैतिक कर्तव्य है कि वह इस बच्चे की बेगुनाह मां को घर जाने दे।

भाजपा सरकार ने नागरिक प्रदर्शनों को दबाने के लिए ऐसी अमानवीयता दिखाई है, एक छोटे से बच्चे को मां-बाप से जुदा कर दिया है। चंपक की तबीयत खराब हो गई है लेकिन भाजपा सरकार की खराब नीयत पर कोई असर नहीं पड़ा है। चंपक के माता-पिता शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के चलते जेल में हैं। चंपक की रिहाई को लेकर दादी ने पीएम मोदी से भी गुहार लगाई थी।  
 

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