डॉ. निशा माथुर

मैं नतमस्तक हो बाबा, श्रद्धा के फूल चढ़ाऊं, जय भीमा, जय भीमा, तेरे चरणों की धूल कहाऊं!! अर्थशास्त्री, कानून के ज्ञाता, भीमाबाई...
ये इत्र-सी स्त्रियां!! महकाती फुलवारियां, रूह-रूह कोने-कोने, चहकती ज़िंदगियां!!
डॉ. निशा माथुर को सक्रिय रूप से साहित्य, कला, शिक्षा, उद्यमी और समाजसेवा कार्यों में भूमिका निभाने के लिए 'विलक्षणा समाजसेवा...
मोहे हर जनम बिटिया ही कीजो, वही मेरे बाबुल का आंगन दीजो, वही नीम छैयां सा कानन दीजो, भीगता था जहां प्यारा-सा बचपन,
राजस्थान के जयपुर की समाज प्रसिद्ध महिलाएं 'राष्ट्रीय गौरव अवार्ड' से हरियाणा के करनाल में सम्मानित हुईं, जिनमें से...
देख रही हूं कुछ गड़बड़ है, ये बेचैनी और ये हड़बड़ है!! मोहब्बत नई दिखे है जालिम, बोली में भी तेरे खड़खड़ है!!
पापा, आना सरहद पार से, दुश्मन के घरबार से। रस्ता देखे थकी हैं अंखियां, चुप हूं मेरी खो गई निंदिया।
मैं नतमस्तक हो बाबा, श्रद्धा के फूल चढ़ाऊं, जय भीमा, जय भीमा, तेरे चरणों की धूल कहाऊं!! अर्थशास्त्री, कानून के ज्ञाता, भीमाबाई...
ऐ दिल जरा बचपन की गलियों से गुजर आऊं, गरमी की छुट्टियों को तगड़े आलस में जी आऊं, भानुमति के पिटारे से निकलूं छोटी सी छोरी...
तथागत का हंसता-सा चित्र पुष्पहारों से हो रहा सुवासित कोविद, आगंतुक सभी उपस्थित अब होगा गरूड़ पुराण वाचित!!
धक-धक-सी महकी सांसें हैं, मदहोशियां छाईं, झूमे पलाश मदमस्त सा, जामुनिया भी बौराई। मन-मयूरा नाचे ता धिक, आज पी के भंग तरंग,
जयपुर में रविवार, 11 फरवरी को मानसरोवर के जीडी बडाया मेमोरियल ऑडिटोरियम में हुआ इंडियन ट्रिलब्लाजेर अवॉर्ड-2018। आयोजक...
सुन री, चिड़कली हो के विदा, आइयो रे, घर की है सूनी देहरी, निरखत जाइयो रे।
अलसवेरे ढोलक की थाप, नौबत बधाइयां, सुरों की सप्तक संग, संगीत में रुबाइयां, किन्नरों की किस्मत में, कैसी ये रुसवाइयां...
जब चांदनी मेरी छत पे पिघले, पूनम का चांद मचलता हो, जब बरखा रानी बिजुरी को छेड़े,