मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम 80.38 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड के दाम 73.28 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए। ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला ये रास्ता बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है।
सोमवार को एक समय यह अनुबंध 82.37 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया था, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान अमेरिका में तनाव जितना लंबा चलेगा। इसकी कीमतों में और तेजी का जोखिम उतना बढ़ेगा।
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व
दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल की सप्लाय इसी रास्ते से होती है। यहां से सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन और यूएई का तेल और गैस अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। युद्ध की वजह से 200 से ज्यादा जहाज खाड़ी और आसपास लंगर डाले हुए हैं।
कैसी है भारत की तैयारी
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद, भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत नहीं बढ़ेंगे। पेट्रोलियम मंत्रालय आपूर्ति स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। सरकारी तेल कंपनियों ने भी पुराने नुकसान की भरपाई कर ली है। ऐसे में देश में तत्काल पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने की संभावना नहीं है।