संत रामपाल को हाई कोर्ट से मिली जमानत, हैरान कर देगी दूध से नहाने वाले बाबा की कहानी

वेबदुनिया न्यूज डेस्क

बुधवार, 8 अप्रैल 2026 (15:12 IST)
Saint Rampal News : पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बुधवार को स्वयंभू संत रामपाल को देशद्रोह के एक मामले में जमानत दे दी। 2014 से हिसार जेल में बंद रामपाल लगभग 11 साल बाद जेल से बाहर आएंगे। रामपाल पर मर्डर से लेकर दंगा भड़काने के भी मामले दर्ज हैं। बाबा दूध से नहाता था और उस दूध से बनी खीर का प्रसाद भक्तों में बांटा जाता था।
 
संत रामपाल को हरियाणा के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में प्रशासन और समर्थकों के बीच बड़ा टकराव के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस झड़प के दौरान 6 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इसी मामले से जुड़े विभिन्न आरोपों के तहत संत रामपाल के खिलाफ कई केस दर्ज किए गए थे, इनमें देशद्रोह का मामला भी शामिल था। 2018 में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
 
हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद संत रामपाल की जेल से रिहाई अन्य मामलों की कानूनी स्थिति पर निर्भर करेगी। उनके खिलाफ अलग‑अलग अदालतों में कई मुकदमे लंबित हैं।
 

कैसे संत बना रामपाल?

सोनीपत के गोहाना तहसील के धनाना गांव में रामपाल दास का जन्म हुआ था। पढ़ाई पूरी करने के बाद रामपाल ने हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर की नौकरी की। नौकरी के दौरान रामपाल की मुलाकात 107 साल के कबीरपंथी संत स्वामी रामदेवानंद महाराज हुई। रामपाल रामदेवानंद का शिष्य बन गया।
 
21 मई 1995 को रामपाल ने 18 साल की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और सत्संग करने लगा। रामपाल के अनुयायियों की संख्या बढ़ती चली गई। कमला देवी नाम की एक महिला ने करोंथा गांव में बाबा रामपाल दास महाराज को आश्रम के लिए जमीन दे दी। 1999 में बंदी छोड़ ट्रस्ट की सहायता से रामपाल ने सतलोक आश्रम की नींव रखी।

जांच में हुए थे कई सनसनीखेज खुलासे

रामपाल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आश्रम की सघन तलाशी ली थी और उस दौरान कई सनसनीखेज खुलासे हुए थे। उस समय पता चला था कि बाबा दूध से नहाता था और उस दूध से बनी खीर का प्रसाद भक्तों में बांटा जाता था। ऑपरेशन के दौरान आश्रम में गुप्‍त ठिकानों के अलावा स्विमिंग पूल और टॉयलेट्स में सीसीटीवी भी लगे मिले थे। रामपाल ने सुरंग और खास लिफ्ट बनवा रखी है। इसी लिफ्ट से वह भक्तों के बीच प्रकट होता था।

2 मामले में बाबा को उम्रकैद

 
हिसार की एक अदालत ने 2018 में हत्या के दो मामलों में स्वयंभू बाबा रामपाल को मंगलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। रामपाल और उसके समर्थकों के खिलाफ दोनों मामले बरवाला पुलिस थाने में 19 नवंबर 2014 को दर्ज कराए गए थे। पहला मामला दिल्ली में बदरपुर के पास मीठापुर के रहने वाले शिवपाल की शिकायत पर दर्ज किया गया था जबकि दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के जखोरा गांव निवासी सुरेश की शिकायत पर दर्ज किया गया था।
 
दोनों ने आरोप लगाया था कि बरवाला गांव स्थित रामपाल के आश्रम में उनकी पत्नियों को स्वयंभू बाबा और उनके समर्थकों ने बंदी बना रखा था और वहीं उनकी हत्या कर दी गई थी, बरवाला पुलिस ने दोनों प्राथमिकियों में हत्या के अलावा गलत तरीके से बंधक बनाने के भी आरोप लगाए थे। 
edited by : Nrapendra Gupta

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