मध्य पूर्व में व्याप्त संकट से अरब क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं के लिए गहराता जोखिम

UN

बुधवार, 1 अप्रैल 2026 (16:01 IST)
मध्य पूर्व में भड़का सैन्य टकराव यदि आगामी दिनों में भी जारी रहा तो यह अरब क्षेत्र में 36 लाख रोज़गारों के ख़त्म होने और 40 लाख लोगों के निर्धनता के गर्त में धंसने की वजह बन सकता है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने अपने एक नए आकलन में आगाह किया है कि इस संकट से कड़ी मेहनत के बाद हासिल की गई प्रगति की दिशा पलटने का जोखिम है।
 
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने मध्य पूर्व में सैन्य टकराव के आर्थिक-सामाजिक नतीजों पर मंगलवार को अपना एक नया अध्ययन जारी किया है, जिसमें ये आंकड़े साझा किए गए हैं। UNDP के अनुसार, मध्य पूर्व क्षेत्र में हिंसक टकराव अब अपने पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 3.7 से 6 प्रतिशत तक की चपत झेलनी पड़ सकती है। 
 
120 से 194 अरब डॉलर के नुक़सान को दर्शाने वाली यह रकम वर्ष 2025 में जीडीपी में क्षेत्रीय स्तर पर दर्ज की गई कुल प्रगति से अधिक है। वहीं बेरोज़गारी दर में 4 प्रतिशत अंकों का अनुमान है, जो कि 36 लाख रोज़गारों की हानि को दर्शाता है, यानि इस क्षेत्र में 2025 में सृजित कुल नौकरियों से भी अधिक। यदि ऐसा हुआ तो लगभग 40 लाख लोग निर्धनता के गर्त में धंसने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
ALSO READ: खाड़ी युद्ध नियंत्रण से बाहर, Diplomacy की सीढ़ी का सहारा लेने की अपील
आकलन के अनुसार, इस क्षेत्र में जिस तरह से ढांचागत कमज़ोरियां हैं, अल्प-अवधि का सैन्य टकराव भी लम्बे समय के लिए गम्भीर आर्थिक व सामाजिक चुनौतियों को जन्म दे सकता है। यूएन विकास कार्यक्रम में अरब देशों के लिए ब्यूरो के निदेशक अब्दल्लाह अर दरदारी ने सचेत किया कि यह संकट इस क्षेत्र में स्थित देशों के लिए चिन्ता की घंटी है। 
 
यह क्षण इस क्षेत्र में विकास प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है और उन्हें अपनी नीतियों की फिर से समीक्षा करनी होगी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अर्थव्यवस्थाओं में केवल हाइड्रोकार्बन पर निर्भरता से आगे बढ़ना होगा, आर्थिक गतिविधियों में विविधता लानी होगी, व्यापार और लॉजिस्टिक व्यवस्था को सुरक्षित और आर्थिक साझेदारियों को व्यापक बनाना होगा ताकि ऐसे झटकों से बचा जा सके। 
ALSO READ: WMO की चेतावनी, तेज गति से गर्मा रही पृथ्वी, बिगड़ रहा जलवायु संतुलन

आर्थिक गतिविधियों में व्यवधान

चार सप्ताह से जारी इस हिंसक टकराव के असर को समझने के लिए व्यापार लागत में वृद्धि, उत्पादकता में अस्थाई हानि, पूंजी के नुक़सान जैसे पैमाने का अध्ययन किया गया है : मध्यम स्तर पर व्यवधान से लेकर चरम व्यवधान तक, जिसमें व्यापार लागत में 100 गुना वृद्धि हो और तेल व गैस का उत्पादन रुक जाए।
 
अनुमान दर्शाते हैं कि सबसे अधिक आर्थिक हानि खाड़ी क्षेत्र में स्थित देशों (सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, क़तर, ओमान) और लेवान्त उप क्षेत्र में लेबनान, सीरिया, फ़लस्तीन, जॉर्डन जैसे देशों में केन्द्रित है। आर्थिक गतिविधियों में व्यवधान आने और ऊर्जा बाज़ारों में मची उथल-पुथल से निवेश, उत्पादन और व्यापार पर गहरा असर हुआ है।
ALSO READ: ईरान : भीषण हमलों में बड़ी संख्या में लोग हताहत, विशाल पैमाने पर विस्थापन
इन दोनों क्षेत्रों में जीडीपी को लगभग 5.2 से 8.5 प्रतिशत तक का नुक़सान हो सकता है। निर्धनता का स्तर, लेवान्त उप क्षेत्र और सबसे कम विकसित अरब देशों में बढ़ने की आशंका अधिक है, जहां हालात विशेष रूप से चिन्ताजनक हैं और सामाजिक सुरक्षा को ठेस पहुंची है।
 
लेवान्त में 28 से 33 लाख अतिरिक्त लोग निर्धनता का शिकार हो सकते हैं। वहीं मानव विकास सूचकांक में भी 0.2 से 0.4 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है, जो कि छह महीने से 1 वर्ष तक में हासिल की जाने वाली प्रगति को दर्शाता है। 

वेबदुनिया पर पढ़ें

सम्बंधित जानकारी