israel iran war: 19 मार्च 2026 से हिंदू नव संवत्सर 2083 प्रारंभ हो रहा है। प्रत्येक संवत्सर का एक अलग नाम होता है। उसी नाम के अनुरूप वर्ष का फल भी माना गया है। जैसे इस बार के नव संवत्सर का नाम रौद्र है। इसका अर्थ है भयंकर क्रोध। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह समय अपने साथ भीषण विनाश और नरसंहार लेकर आ सकता है। हिंदू वर्ष का राजा गुरु और मंत्री मंगल है। इससे धर्म योद्धा योग बन रहा है। मध्य एशिया में जारी हिंसा की लपटें दक्षिण एशिया तक पहुँचने की आशंका है, जिससे पूरी दुनिया में भय का वातावरण बनेगा। यह 5 घटनाओं के घटने की संभावना है प्रबल।
हिंदू नववर्ष रौद्र संवत्सर का फल:
राजा गुरु: न्याय, सुख, अच्छी फसल और धार्मिक कार्यों में वृद्धि, लेकिन अतिचारी होने से इसकी गारंटी नहीं।
मंत्री मंगल: साहस, सैन्य विजय, अग्नि भय, विस्फोट, राजनीतिक उथल-पुथल और युद्ध।
रौद्र नाम फलम: प्राकृतिक प्रकोप, युद्ध, नरसंहार, जनविद्रोह और सत्ता परिवर्तन के संकेत।
परिणाम:
1. भीषण होगा संग्राम: विश्व मंच पर रौद्र संवत्सर का नाम ही 'उग्रता' का संकेत देता है, लेकिन गुरु का नेतृत्व इसे अनियंत्रित होने से बचाएगा। हालांकि गुरु के अतिचारी होने से इसकी संभावना कम ही लगती है। इसका अर्थ है कि युद्ध तो भीषण होगा लेकिन बीच बीच में इसे रोकने वाली शक्तियां सक्रिय होकर मानवता को बचाने का कार्य भी करेंगी। वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान और धर्म को बचाने की प्रवृत्ति बढ़ेगी, जिससे कहीं-कहीं वैचारिक टकराव युद्ध और दंगों का रूप लेने की संभावना भी है। भारत का पाकिस्तान से युद्ध भी अगले सूर्य और चंद्र ग्रहण के बीच होने की संभावना है।
2. कई देशों का बदलेगा भूगोल: मंगल मंत्री होने के कारण दुनिया के कई हिस्सों में सीमा को लेकर तनाव या युद्ध की स्थिति तो बगेगी ही इसी के साथ ही आने वाले समय में कई देशों का नक्क्षा ही बदल जाएगा। इसमें पाकिस्तान, यूक्रेन, ईरान, अफगानिस्तान, चीन, बांग्लादेश और भारत शामिल हो सकते हैं।
3. मौसम में भारी बदलाव: भीषण गर्मी, लू और सूखे जैसी स्थितियां देखने को मिल सकती हैं, जिससे प्रकृति में रौद्र रूप दिखेगा। हालांकि, राजा बृहस्पति के कारण, कृषि और उत्पादन के क्षेत्र में मिश्रित या अप्रत्याशित परिणाम मिल सकते हैं। 9.5 की तीव्रता वाला भूकंप आ सकता है। 'रौद्र' संवत्सर होने से प्राकृतिक आपदाओं (विशेषकर अग्नि और वायु से जुड़ी) के कारण बाधाएं आ सकती हैं।
4. अर्थव्यवस्था: गुरु की दृष्टि के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में बहुत बड़े बदलाव होंगे और दुनिया एक नए अर्थ तंत्र के बीच सफर करेगी। लोगों की सोच और आजीविका के साथनों में बदलावा होगा। भले ही सोने-चांदी के भाव आसमान छू जाएं लेकिन यह लोगों के किसी काम के नहीं रहेंगे। लोगों को चिंता अपने जीवन को चलाने की रहेगी।
5. स्पेस क्रांति: मानव सभ्यता अंतरिक्ष में कोई बड़ी छल्लांग लगाने की तैयारी करेगी। अंतरिक्ष से किसी भी प्रकार का कोई बड़ा संबंध बनेगा। विमान से यात्रा करने वालों को सतर्क रहना होगा।