इसी क्रम में आगामी 02 फरवरी फाल्गुन कृष्ण प्रतिपदा दिन सोमवार को शुक्र का तारा पश्चिम दिशा में उदित होगा। शुक्रोदय होने के साथ ही विगत एक माह से चला आ रहा विवाह आदि शुभ एवं मांगलिक कार्यों पर लगा विराम हट जाएगा एवं विवाह, मुण्डन, सगाई, गृहारंभ व गृहप्रवेश के साथ व्रतारंभ एवं व्रतउद्यापन आदि शुभ कार्य पुन: प्रारंभ हो जाएंगे।
17 फरवरी को होगी भौमवती अमावस्या-
हमारे शास्त्रों में भौमवती अमावस्या को अति दुर्लभ एवं पवित्र मुहूर्त माना गया है। दुर्गा सप्तशती में भौमावस्या के दिन मां दुर्गा की आराधना करने से अभीष्ट फल की प्राप्ति एवं अनंत पुण्यफल के प्राप्त होने का वर्णन मिलता है। आगामी 17 फरवरी को भौमवती अमावस्या है। भौमवती अमावस्या के आशय है कि जिस दिन मंगलवार के दिन अमावस्या होती है उसे 'भौमवती अमावस्या' या 'भौमावस्या' कहा जाता है।