गिरीश पांडेय
गिरीश पांडेय को विभिन्न मीडिया संस्थानों में तीन दशक से भी ज्यादा समय तक कार्य करने का अनुभव है। राजनीतिक, सामाजिक एवं समसामयिक मुद्दों पर इनकी गहरी पकड़ है।
Mohsina Kidwai, passed away: श्रीमती मोहसिना किदवई उस दौर की नेता थीं जब राजनेताओं का अपना एक व्यक्तित्व, वजूद, वसूल और सम्मान हुआ करता था। उनका दायरा...
लाइन में लगने की आलोचना करने वालों के मैं सख़्त ख़िलाफ़ हूं। लाइन में लगने के ढेर सारे लाभ हैं। यही वजह है कि आज़ादी के बाद पैदा हुए हम जैसे लोगों को हर...
Fertilizer Crisis 2026: रूस और चीन के हालिया फैसलों ने वैश्विक उर्वरक बाजार में हलचल बढ़ा दी है। रूस ने घरेलू मांग को प्राथमिकता देते हुए एक महीने के लिए...
सिलेंडर की कमी के चलते इन दिनों चूल्हा फिर चर्चा में है। वर्षों बाद इस कदर चर्चा में आने से चूल्हा चहक रहा है। तो आइए, हम भी चूल्हे के बारे में कुछ बातें...
देश भर के गधे खुश हैं। उनका कहना है कि बदनाम तो बहुत हुए, पर चलो अब नाम तो हो रहा है। नेता और सरकार तो कम से कम हमारे बारे में सोच रहे हैं। अब इंसानों...
60 वर्ष की उम्र के बाद की जिंदगी की पारी को T-20 मैच की तरह बेखौफ खेलें। हर गेंद को बाउंड्री के बाहर भेजने का प्रयास करें। क्योंकि आप कब जिंदगी से आउट...
कथनी, सोच और करनी में फर्क — यही इस दौर में देश-दुनिया का सबसे बड़ा रोग है। यह रोग दिखता नहीं, पर है बेहद संक्रामक। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इससे पीड़ित...
हमारे नेताओं की दूरदर्शिता का जवाब नहीं। सच बोलते हैं। सार्वजनिक मंचों से तो और भी सोच-समझकर। चुनाव के समय तो सच को छोड़ और कुछ बोलते ही नहीं। कभी किसी...
एक रात सपने में गांव के घर की चौखट का दीदार हुआ। वह उदास और मायूस थी—अपनों के इंतज़ार में थकी-थकी आंखें लिए। सहसा मैं उसे पहचान नहीं सका। मेरे चेहरे पर...
हर महानगर की छाती पर कुछ बाड़े चिपके रहते हैं—सबसे पॉश मोहल्लों से सटे, लेकिन उनसे कोसों दूर। एक तरफ़ बहुमंजिला अपार्टमेंट्स और विलाएं, जहां सुख-सुविधाएं...
मृत्यु से पूर्व किसी किसी के संपूर्ण चेतना के लौट आने के बारे में कई लोगों से सुना हूं। खुद में यह दुर्लभ होता है और रोमांचक भी। अगर किसी को अल्जाइमर (एक...
अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी ने हिंसा की विशद व्याख्या की है। उनके अनुसार हिंसा मन, वचन और कर्म से होती है। सवाल—क्या अहिंसा के इस सबसे बड़े पुजारी का...
नमक— इसकी ज़रूरत हर जगह होती है। थोड़ा ही सही, पर यह ज़रूरी होता है। नमक और जायका भोजन में एक-दूसरे के पूरक हैं, वह भी संतुलित मात्रा में। न हो तो भी स्वाद...
लंगोट। कपड़े का एक छोटा सा टुकड़ा। इस छोटे से कपड़े पर मुहावरे तो कई हैं, पर लिखा कम गया है। खासकर इसकी बराबरी करने वाली बिकनी की तुलना में तो न के बराबर।
छोटा कद, गठीला शरीर, जामुनी रंग, चेहरे पर हमेशा हंसी। इस हंसी की वजह से उसके मोती जैसे दांत चमकते रहते थे। उसके जामुनी रंग में एक खास चमक थी। हंसते हुए...
बात उस दौर की है जब खत लिखे जाते थे। तब खत लिखना अपने आप में एक मुकम्मल सफर होता था—दिमाग से शुरू होकर दिल तक पहुंचने वाला सफर। और हर सफर की तरह इसकी भी...
रात करीब 10 बजे अखबार के दफ्तर से घर लौटा। कॉलबेल की आवाज सुन पत्नी (बेबी) ने दरवाजा खोला। पत्नी के आंखों में दर्द और उदासी झलक रही थी। अम्मा के कमरे में...
बेशक! हाथी शान की सवारी है। राजा-महाराजा हाथियों पर चलते रहे हैं। कभी युद्धभूमि में हाथी सवार सैनिकों की भूमिका निर्णायक होती थी—अक्सर जीत का सेहरा भी...
बात 1970 के शुरुआती दशक की है। मैं मिडिल स्कूल में पढ़ता था। क्लास कौन-सी थी, ठीक याद नहीं। हमारा स्कूल बेलाबीरभान और मेरा गांव सोनइचा पास-पास ही थे। बल्कि...
एक महिला अपनी संतान के लिए कुछ भी कर सकती है। वह अपनी जान की परवाह किए बिना किसी भी हिंसक जानवर से भिड़ सकती है। ऐसी खबरें अक्सर सुर्खियों में रहती हैं।...