गिरीश पांडेय

The author is a senior journalist.
देश भर के गधे खुश हैं। उनका कहना है कि बदनाम तो बहुत हुए, पर चलो अब नाम तो हो रहा है। नेता और सरकार तो कम से कम हमारे बारे में सोच रहे हैं। अब इंसानों...
60 वर्ष की उम्र के बाद की जिंदगी की पारी को T-20 मैच की तरह बेखौफ खेलें। हर गेंद को बाउंड्री के बाहर भेजने का प्रयास करें। क्योंकि आप कब जिंदगी से आउट...
कथनी, सोच और करनी में फर्क — यही इस दौर में देश-दुनिया का सबसे बड़ा रोग है। यह रोग दिखता नहीं, पर है बेहद संक्रामक। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इससे पीड़ित...
हमारे नेताओं की दूरदर्शिता का जवाब नहीं। सच बोलते हैं। सार्वजनिक मंचों से तो और भी सोच-समझकर। चुनाव के समय तो सच को छोड़ और कुछ बोलते ही नहीं। कभी किसी...
एक रात सपने में गांव के घर की चौखट का दीदार हुआ। वह उदास और मायूस थी—अपनों के इंतज़ार में थकी-थकी आंखें लिए। सहसा मैं उसे पहचान नहीं सका। मेरे चेहरे पर...
हर महानगर की छाती पर कुछ बाड़े चिपके रहते हैं—सबसे पॉश मोहल्लों से सटे, लेकिन उनसे कोसों दूर। एक तरफ़ बहुमंजिला अपार्टमेंट्स और विलाएं, जहां सुख-सुविधाएं...
मृत्यु से पूर्व किसी किसी के संपूर्ण चेतना के लौट आने के बारे में कई लोगों से सुना हूं। खुद में यह दुर्लभ होता है और रोमांचक भी। अगर किसी को अल्जाइमर (एक...
अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी ने हिंसा की विशद व्याख्या की है। उनके अनुसार हिंसा मन, वचन और कर्म से होती है। सवाल—क्या अहिंसा के इस सबसे बड़े पुजारी का...
नमक— इसकी ज़रूरत हर जगह होती है। थोड़ा ही सही, पर यह ज़रूरी होता है। नमक और जायका भोजन में एक-दूसरे के पूरक हैं, वह भी संतुलित मात्रा में। न हो तो भी स्वाद...

लंगोट बनाम बिकनी

रविवार, 15 फ़रवरी 2026
लंगोट। कपड़े का एक छोटा सा टुकड़ा। इस छोटे से कपड़े पर मुहावरे तो कई हैं, पर लिखा कम गया है। खासकर इसकी बराबरी करने वाली बिकनी की तुलना में तो न के बराबर।
छोटा कद, गठीला शरीर, जामुनी रंग, चेहरे पर हमेशा हंसी। इस हंसी की वजह से उसके मोती जैसे दांत चमकते रहते थे। उसके जामुनी रंग में एक खास चमक थी। हंसते हुए...
बात उस दौर की है जब खत लिखे जाते थे। तब खत लिखना अपने आप में एक मुकम्मल सफर होता था—दिमाग से शुरू होकर दिल तक पहुंचने वाला सफर। और हर सफर की तरह इसकी भी...
रात करीब 10 बजे अखबार के दफ्तर से घर लौटा। कॉलबेल की आवाज सुन पत्नी (बेबी) ने दरवाजा खोला। पत्नी के आंखों में दर्द और उदासी झलक रही थी। अम्मा के कमरे में...
बेशक! हाथी शान की सवारी है। राजा-महाराजा हाथियों पर चलते रहे हैं। कभी युद्धभूमि में हाथी सवार सैनिकों की भूमिका निर्णायक होती थी—अक्सर जीत का सेहरा भी...
बात 1970 के शुरुआती दशक की है। मैं मिडिल स्कूल में पढ़ता था। क्लास कौन-सी थी, ठीक याद नहीं। हमारा स्कूल बेलाबीरभान और मेरा गांव सोनइचा पास-पास ही थे। बल्कि...
एक महिला अपनी संतान के लिए कुछ भी कर सकती है। वह अपनी जान की परवाह किए बिना किसी भी हिंसक जानवर से भिड़ सकती है। ऐसी खबरें अक्सर सुर्खियों में रहती हैं।...
मेरी पढ़ाई मिडिल क्लास (कक्षा आठ) तक गांव में हुई। गांव गोरखपुर जिले के गगहा थाने में पड़ता था। गांव का नाम था.. सोनइचा। वह दौर था ढेबरी (दीया) का—लालटेन...
ट्रक को सड़क का यमराज कहते हैं— भले ही यमराज हों, लेकिन देवता तो हैं ही! इसलिए इंसानों से श्रेष्ठ होने का दावा बिल्कुल जायज है। ट्रक चालक इस महत्ता को...
समय के साथ झूठ ने खासी तरक्की कर ली है। पहले झूठ के पांव नहीं होते थे। पर अब थोड़े कमजोर ही सही झूठ के भी पांव होने लगे हैं। वह खुद के पांव पर खड़ा भी...
Monkeys of Vrindavan: अदरक का स्वाद जानें या नहीं, फ्रूटी का स्वाद खूब जानते हैं वृंदावन के बंदर बंदर क्या जानें अदरक का स्वाद… अब ये मुहावरा कितना सच...