नास्त्रेदमस को टक्कर देते भारत के 7 भविष्यवक्ता, जानें चौंकाने वाली भविष्यवाणियां

अनिरुद्ध जोशी

सोमवार, 20 अप्रैल 2026 (13:23 IST)
7 prophets of India: भारत के लगभग हर प्रांत में ऐसे सिद्ध पुरुष, संत और ज्योतिषी रहे हैं जिनकी भविष्यवाणियों ने स्थानीय स्तर पर लोगों को प्रभावित किया है। इन भविष्यवक्ताओं ने अक्सर क्षेत्रीय भाषाओं में अपनी बातें लिखीं और समय पर इनकी बातों को कभी प्रचारित या प्रसारित नहीं किया गया जिसके चलते विदेश के तथाकथित ज्योतिष और भविष्‍यवक्तों की भविष्यवाणियों को ही सच मानकर उन्हें ही महान समझा गया, जबकि उन भविष्यवक्तों ने अपनी भविष्‍य की किताबों में गोलमाल छंदों में भविष्य की बाते लिखी हैं, लेकिन भारत के संतों ने स्पष्ट रूप से भविष्य को लिखा है। चलिए जानते हैं ऐसे ही संतों और उनकी किताबों के बारे में संक्षिप्त जानकारी।
 

1. संत ज्ञानेश्वर महाराज: (1275-1296):

महाराष्ट्र के महान संत, जिन्होंने 'ज्ञानेश्वरी' में न केवल दार्शनिक बातें कहीं, बल्कि युगों के चक्र और भक्ति मार्ग के भविष्य के बारे में भी संकेत दिए। 13वीं शताब्दी के महान संत ज्ञानेश्वर ने अपनी रचना 'ज्ञानेश्वरी' के अंत में 'पसायदान' (विश्व कल्याण की प्रार्थना) के माध्यम से भविष्य के समाज की कल्पना की थी।
 
 उन्होंने भविष्य में एक ऐसे समाज की भविष्यवाणी की थी जहाँ "अधर्म का अंधेरा मिटेगा और सूर्य के समान तेज वाला धर्म उदय होगा।" उन्होंने कलियुग के कठिन समय में भी मनुष्य के भीतर 'चेतना' जागृत होने की बात कही थी। इसके अलावा संत नामदेव, संत तुकाराम, संत एकनाथ, संत तुकड़ों महराज, समर्थ रामदास स्वामी, संत गाडगे बाबा और तुकडोजी महाराज ने भी कई भविष्‍यवाणियां की है।
 

2. ओडिशा के संत अच्युतानंद दास महाराज: (1510-1570) 

ओडिसा के पंचसखा में से एक संत अच्युतानंद दास ने सदियों पहले की हजारों ऐसी भविष्यवाणियां कर दी थी जो समय के साथ सच साबित हुई है। उनकी भविष्‍यवाणियों के ग्रंथ को 'भविष्य मालिका' कहते हैं। उन्होंने 13 मुस्लिम देशों द्वारा भारत पर हमले की बात भी लिखी है। एक समय ऐसा आएगा जब जगन्नाथ मंदिर की ध्वजा गिर जाएगी और समुद्र का पानी मंदिर की सीढ़ियों तक पहुंच जाएगा, तब धरती पर बड़े बदलाव होंगे। महापुरुष अच्युतानंद दास की 'भविष्य मालिका' में कलयुग के अंत और तीसरे विश्व युद्ध जैसी भविष्यवाणियाँ संकलित हैं। उन्होंने वर्तमान समय के संबंध में की कई भविष्यवाणियां लिखी हैं।
 

3. कृष्‍ण भक्त संत सूरदास: (1478-1583)

कृष्ण भक्त संत सूरदास के कुछ पदों में कलियुग के अंत और आने वाले समय के बदलावों का वर्णन मिलता है। सूरदास जी द्वारा रचित 'सूरसागर' और 'सूरसारावली' में कलयुग के अंत और विशेष कालों के लिए भविष्यवाणी मानी जाती है। इसमें संवत 2000 के बाद भीषण अकाल, महामारी, प्राकृतिक आपदाओं, नैतिक पतन और युद्ध जैसी विनाशकारी घटनाओं का जिक्र है। उसके बाद एक किसान के घर एक महात्मा पैदा होगा जो शांति और भाई चारा स्थापित करेगा। एक धर्मात्मा इस विनाशकारी समय को वश में करेगा और लोगों को धर्मज्ञान की शिक्षा देगा। उन्होंने 21वीं सदी में विनाश के बाद, एक लंबे समय (सहस्र वर्ष) के लिए सतयुग के आगमन और सुख-शांति की बात कही है।
 

4. आंध्रप्रदेश के संत वीरब्रह्मेंद्र स्वामी: (1608–1694) 

इन्होंने सदियों पहले भविष्यवाणी की थी कि "लोहे के घोड़े दौड़ेंगे" (ट्रेन), बिना बैल के वाहन होंगे (कार), बिना तेल के पानी से उजाला होगा (बिजली) और इंसान पक्षियों की तरह उड़ेंगे (हवाई जहाज)। महान युद्ध होंगे और लाइलाज महामारियां आएंगी। इनकी भविष्यवाणियां दक्षिण भारत के गांवों में आज भी गाई जाती हैं। इनकी भविष्यवाणियों के ग्रंथ को 'कालज्ञानम' कहते हैं। इसमें हजारों भविष्यवाणियां लिखी हैं। उन्होंने वर्तमान समय के संबंध में की कई भविष्यवाणियां लिखी हैं।
 

5. श्री गुरु गोविंद सिंह जी (1666-1708): 

सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी और उनके सिखों के बीच हुए संवाद, उनके जीवन की घटनाएं और सबसे महत्वपूर्ण- भविष्य की भविष्यवाणियाँ पर आधारित एक ग्रंथ है जिसे 100 साखियां (अध्याय) कहते हैं। सौ साखी को मुख्य रूप से इसकी भविष्यवाणियों के लिए जाना जाता है। इसमें कलियुग के अंत, खालसा राज के पुनरुत्थान और भविष्य के युद्धों के बारे में संकेत दिए गए हैं। आधुनिक व्याख्याकार मानते हैं कि इसमें उत्तर की दिशा से होने वाले बड़े युद्धों का भी उल्लेख है।
 

6. गुजरात के संत देवत अयात: (लगभग 14वीं-15वीं शताब्दी):

संत देवत अयात मुख्य रूप से राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र और गुजरात के सीमावर्ती इलाकों से संबंधित थे। उन्हें 'त्रिकालज्ञ' माना जाता है। उन्होंने आने वाले समय (कलियुग) के बारे में ऐसी बातें कहीं थीं जो आज के समय में काफी सटीक बैठती हैं। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि धर्म केवल ढोंग और प्रदर्शन तक सीमित रह जाएगा। सच्चे साधु दुर्लभ होंगे और पाखंडी पूजे जाएंगे।उन्होंने दूर-संचार और आधुनिक मशीनों की ओर इशारा करते हुए कहा था कि "हवा में बातें होंगी" और लोहे के वाहन बिना घोड़ों के दौड़ेंगे। उनकी वाणियों में उल्लेख मिलता है कि जब अन्याय अपनी सीमा लांघ जाएगा, तब एक दैवीय शक्ति (महाशक्ति) का आगमन होगा जो अधर्म का विनाश करेगी। उन्हें विशेष रूप से उनकी 'आगमवाणी' (भविष्यवाणियों) के लिए जाना जाता है।
 

7. गुजरात के संत मावजी महाराज: (1714-174):

मावजी महाराज की अब तक की भविष्यवाणियां सच साबित हुई है। मावजी महाराज ने वायुयान, मोबाइल और कंप्यूटर के अविष्कार की भविष्यवाणी भी की है। उन्होंने लिखा है गुजरात का डंका बजेगा और दिल्ली में दीया जलेगा। वर्तमान में नरेंद्र मोदी और अमितशाह के कारण गुजरात का डंका ही बज रहा है। कहा जाता है कि 350 वर्ष पहले संत मावजी महाराज ने 5 चौपडे लिखे थे जिसमें से एक शेषपुर, दुसरा साबला, तीसरा बांसवाड़ा व चौथा पूंजपुर में है। उस जमाने में मावजी महाराज ने कागज पर लाख की स्याही और बांस की कलम से 72 लाख 66 हजार भविष्यवाणियों को अपने हाथों से लिखा था। वागड़ी भाषा में लिखी गई यह हस्तलिपियां आज भी साबला स्थित मावजी के जन्म स्थान में सहेजकर रखी गई हैं। उन्होंने वर्तमान समय के संबंध में की कई भविष्यवाणियां लिखी हैं। संत मावजी ने 5 बड़े ग्रंथों की रचना की थी, जिन्हें 'चौपड़ा' कहा जाता है। इनमें उन्होंने तीसरे विश्व युद्ध और भविष्य की कई सटीक भविष्यवाणियां की हैं। ये ग्रंथ केवल दीपावली के दिन दर्शन के लिए बाहर निकाले जाते हैं।
 

भविष्य पुराण: 

उल्लेखनीय है कि स्वामी शिवानन्द के अनुसार- आज विश्व में जो भी घटनाएं घटित हो रही हैं वह शास्त्रानुार पहले से ही सुनिश्चित है। भविष्य पुराण में भगवान वेद व्यास जी ने स्वयं भविष्यवाणी की है कि 4,900 शताब्दि कलियुग बीतने के पश्चात् भारत में बौद्धों का राज्य होगा, तदन्तर आद्य शंकराचार्य जी का प्रादुर्भाव के साथ ही वैदिक धर्म का प्रचार-प्रसार होगा और मनुस्मृति के आधार पर राजा राज्य करेंगें। पुनः 300 वर्षो तक भवनों तथा 200 वर्ष तक ईसाईयों का राज्य रहेगा। उसके बाद मौन (मत पत्रों) का राज्य रहेगा, जो 11 टोपी (राष्ट्रपति) तक चलेगा।
 
यह क्रम लगभग 50 वर्ष तक चलेगा। इसके बाद से किसी भी पार्टी को बहुमत प्राप्त नहीं हो सकेगा। मंहगाई-भ्रष्टाचार बढ़ेगें। माता-पिता, साधु-सन्त, ब्राह्मण-विद्वान अपमानित होगें, तब भयानक युद्ध होगा। भारत पुनः अपने अस्तित्व में आकर विश्व गुरु पद पर स्थापित होगा। भारत में शास्त्रानुसार पुनः राज्य परम्परा की स्थापना होगी।- (राष्ट्रीय सहारा समाचार पत्र, वाराणसी, 8 सितम्बर, 1998) 

वेबदुनिया पर पढ़ें

सम्बंधित जानकारी