नेशनल अवॉर्ड विनर एमएस भास्कर संग वेबदुनिया की खास बातचीत, बोले- कभी नहीं सोचा था मिलेगा इतना बड़ा पुरस्कार

रूना आशीष

गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025 (16:55 IST)
अब मेरी उम्र नहीं रही जहां पर पूरे जोश के साथ चिल्लाऊं और याहू करता फिरू। मैं खुश हूं और मैं भगवान पर पूरा भरोसा करता हूं। मेरे भगवान को मालूम है कि मुझे क्या देना है और क्या नहीं देना है। हां, मेहनत मुझे करते रहनी होगी। कुछ समय पहले मुझे मालूम पड़ा कि मुझे राष्ट्रीय पुरस्कार मिल रहा है। तो मैंने सोचा अच्छा यह सच है। फिर मैंने कहा है, ठीक है। 
 
कुछ पत्रकारों ने मुझसे पूछा भी कि इतने सामान्य तौर पर से कैसे आप रिएक्शन दे रहे हैं। लेकिन जरा सोचिए इतने सारे लोग मुझे प्यार कर रहे हैं। पार्किंग के लिए मुझे पुरस्कृत किया जा रहा है। यह कहना है एमएस भास्कर का जो की तमिल फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने कलाकार हैं। 
 
एमएस भास्कर को 71वां राष्ट्रीय पुरस्कारों में बेस्ट सर्पोटिंग एक्टर का अवॉर्ड मिला है। फिल्म पार्किंग में उनके काम को बहुत सराहना मिली है। और नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुए इस कार्यक्रम के दौरान वेबदुनिया ने इस पूरे समारोह को देखा। और इसी दिन उनसे बातचीत करने का मौका मिला। 
 
एमएस भास्कर तमिल फिल्म इंडस्ट्री में कई अवार्ड जीत चुके हैं। जिसमें की खास तौर पर से उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का स्टेट अवॉर्ड भी मिला है। एमएस भास्कर को इस बात की बेहद खुशी है कि उन्हें अवॉर्ड तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि यानी हमारे कलाइंगर, जिनसे मुझे बेहद प्यार है उनके हाथों मिला। 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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वेबदुनिया संवाददाता और 71वें राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए जूरी मेंबर के तौर पर काम कर चुकी रूना आशीष से उन्होंने बातचीत आगे बढ़ाते हुए कहा, लेकिन हां, राष्ट्रीय पुरस्कार जब मिलता है तो बहुत दिल से संतुष्टि का आभास होता है। लेकिन यहां पर मैं कहना चाहता हूं कि मुझसे ज्यादा तो मेरी जो धर्मपत्नी है। उन्होंने इस अवॉर्ड के लिए भगवान से प्रार्थना है। वह हर दिन भगवान से मांग करती थी कि इस फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिल जाए और मैं हंसकर उसे कहता था कि इतना भी सोचना नहीं चाहिए है। इतनी भी आशाएं मत बंद कर रखो? अगर यह पुरस्कार मुझ तक आना होगा तो वह पहुंच ही जाएगा।
 
एमएस भास्कर वेबदुनिया को आगे बताते हुए कहते हैं कि मुझे ड्राइविंग करना बहुत पसंद है। बिल्कुल किसी फैशन की तरह मुझे गाड़ी चलाते रहना बड़ा मजेदार लगता है। कई बार मेरे मित्र कहते हैं कि 700-800 किलोमीटर दूर जाएंगे और वहां पर ड्राइविंग खत्म करके थोड़ा सा ड्रिंक लेते हैं और ऐसे शाम ‍बिताते हैं। लेकिन मैं एल्कोहौलिक नहीं वर्कहौलिक हूं और जब मैं ड्राइव करता हूं तो मैं सारी परेशानियां भूल जाता हूं और एक हीलिंग की तरह मेरे लिए ड्राइविंग काम करते हैं। 
 
जब मैं पार्किंग फिल्म में काम भी कर रहा था। तुम मुझे नहीं लगा कि ईश्वर या मैं इस फिल्म के हीरो है बल्कि फिल्म का हीरो तो कहानी है और वह इगो है जो इस फिल्म को आगे बढ़ाता है। अब सोचना पार्किंग कितनी महत्वपूर्ण समस्या है। हम जब भी शॉपिंग पर जाते हैं, कहीं ना कहीं पार्क करने के लिए हमें दुकान की तरफ से मदद मिल जाती है। गाड़ी अंदर तो नहीं लेकर जा सकते हैं शॉप में यानी पार्किंग एक ऐसी समस्या है जिसे हर कोई समझ सकता है। 
 
एक्टिंग के बारे में
मुझे नहीं लगता मैं कोई बहुत महान अभिनेता हूं। मैं लोगों को देखता रहता हूं। उनकी बातों का अवलोकन करता हूं। उनके मैनरिज्म को समझने की कोशिश करता हूं और जैसे ही कैमरा ऑन होता है तब मैं एक्टर होता हूं। वरना कैमरा बंद है तो मैं साधारण इंसान ही हूं और आप हो या निदेशक है या मैं हूं हम सब रोजी रोटी कमाने के लिए ही काम कर रहे हैं। जब फिल्म बनाई जा रही थी तब एक्टिंग करते करते या रोल करते करते मुझे लगा था कि एक बहुत अच्छी फिल्म निकलकर आएगी।
 
लेकिन इतनी बड़ी बात हो जाएगी और राष्ट्रपति साहिबा तक बात पहुंच जाएगी और अवॉर्ड भी मिल जाएगा ऐसा कभी नहीं सोचा था। पुरस्कार मिलता है बहुत अच्छी बात है, नहीं मिलता है तो मुझे समझ में आ जाता है कि अभी मुझे और भी मेहनत करनी होगी ताकि अपने आप को बेहतर एक्टर बना सकूं। 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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कमल हासन का वह फोन कॉल 
मैं अपनी एक फिल्म की शूटिंग कर रहा था। ऐसे में कमल अन्ना ने मुझे फोन किया और मुझसे पूछा, क्या चल रहा है मैंने का शूटिंग अन्ना। और क्या? फिर मैंने कहा कि हां अवार्ड मिला है? कमल अन्ना ने फिर पूछा, क्यों मिला तो मैंने जवाब दिया, पता नहीं अन्ना समझ में नहीं आया। कमल अन्ना ने पूछा, जरा लेट नहीं हो क्या? मैंने जवाब दिया नहीं, अन्ना पहले नहीं दिया, अब दे दिया। नहीं देते तो मैं कुछ भी सोच नहीं रखता और इसी तरीके से अपनी जिंदगी को शांतिपूर्वक बिताता रहता। 
 
ऐसा कौन दो लोग होंगे जिनको आप आज के समय में धन्यवाद देना चाहोगे। 
एक तो यह खबर सबसे पहले अपने पिताजी को सुनाता और दूसरा मेरे शिवाजी अप्पा को सुनाता। उनको मैं अप्पा बोलता हूं और मैं उनका बहुत बड़ा भक्त हूं। मैं सुबह उनके गाने सुनता हूं या उनकी फिल्म के सीन देखता हूं और ऐसे दिन की शुरुआत करता हूं। पुरस्कार मिलने के तुरंत बाद जब मैं घर लौटूंगा तो उनके घर पर जाऊंगा और अपना ही पुरस्कार उनके फोटो के सामने रख देने वाला हूं। 
 
मैं उनको बहुत ज्यादा प्यार करता हूं। उनकी बहुत कद्र करता हूं इज्जत करता हूं। उनके बेटे हैं प्रभु अन्ना वह भी मुझसे पूछते थे कि बताओ शिवाजी गणेशन का बेटा कौन तब मैं कहता था, आप नहीं, मैं हूं। उनका बेटा मुझे उनसे बहुत प्यार है लेकिन इसके साथ ही मैं अपने बेटे राम कुमार को धन्यवाद कहना चाहूंगा जिसने यह फिल्म बनाई। रामकुमार ने ही इस फिल्म को निर्देशित किया है। इसके अलावा मैं धन्यवाद देना चाहूंगा सिनीस को भी जिन्होंने इस फिल्म का निर्माण किया है। 
 
मेरा धन्यवाद है उस कमेटी को भी उसने इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना। मैं धन्यवाद देता हूं आपको भी जिन्होंने मेरा इंटरव्यू लिया। और सबसे बड़ा धन्यवाद मैं देता हूं हमारी महामहिम द्रौपदी मुर्मू जी को जिन्होंने अपने हाथ से यह पुरस्कार सौंपा। 

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