फातिमा ने खुलासा किया कि उन्हें अपनी इस बीमारी का पता 2016 में फिल्म 'दंगल' की ट्रेनिंग के दौरान चला। उन्होंने बताया कि वह अभ्यास कर रही थीं, तभी उन्हें अचानक कुछ अजीब महसूस हुआ। उन्हें 'ऑरा' महसूस हो रहा था, जो दौरे से ठीक पहले का संकेत होता है।
फातिमा ने बताया, मुझे लगा कि शायद कुछ नहीं है, सब ठीक हो जाएगा, लेकिन धीरे-धीरे सब बढ़ने लगा। मैंने आसपास के लोगों से कहा कि मुझे दौरा पड़ने वाला है। सौभाग्य से उस वक्त सेट पर आमिर खान, सान्या मल्होत्रा और ट्रेनर कृपा शंकर बिश्नोई मौजूद थे। उन्होंने तुरंत इंटरनेट पर सर्च किया और स्थिति को संभाला। इसके बाद फातिमा को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ MRI और EEG के बाद मिर्गी की पुष्टि हुई।
मिर्गी के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाओं ने फातिमा के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला। फातिमा के अनुसार दवाइयों के कारण वह अक्सर चिड़चिड़ी, उदास और भ्रमित महसूस करती थीं। उन्हें चलने में दिक्कत होती थी और वह हमेशा नशे जैसी हालत में रहती थीं।
इस स्थिति से परेशान होकर फातिमा ने बिना किसी को बताए दवाइयां लेना बंद कर दिया था। फातिमा ने बताया कि वह करीब 4 साल तक इस सच को दुनिया से छिपाती रहीं। जब भी उन्हें लगता कि दौरा आने वाला है, वह खुद को बाथरूम में बंद कर लेती थीं ताकि किसी को पता न चले।
मिर्गी जैसी बीमारी के साथ बॉलीवुड में काम करना आसान नहीं था। फातिमा ने बताया कि तेज रोशनी उनके लिए ट्रिगर का काम करती हैं, इसलिए उन्होंने कई इवेंट्स और स्क्रीनिंग में जाना छोड़ दिया था। हालांकि, अब वह इसे स्वीकार कर चुकी हैं। अपनी फिल्म 'गुस्ताख इश्क' की शूटिंग के दौरान उन्होंने पहले ही क्रू को अपनी स्थिति बता दी थी, जिससे उन्हें काफी सपोर्ट मिला।