अंतिम शाही स्नान में 70 लाख ने लगाई डुबकी

शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013 (20:43 IST)
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इलाहाबाद। बसंत पंचमी के मौके पर 70 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने शुक्रवार को संगम में डुबकी लगाई। इस मौके पर विभिन्न अखाड़ों के संन्यासियों ने भी महाकुंभ के तीसरे और अंतिम ‘शाही स्नान’ में हिस्सा लिया। उधर आज तड़के कुंभ मेला परिसर में लगी आग में दो व्यक्ति की मौत हो गई।

शाही स्नान की फोटो गैलरी देखने के लिए यहां क्लिक करें....वैष्णव और नागा साधुओं का शाही स्नान

मौनी अमावस्या के दिन हुई 39 व आज सुबह हुई दो लोगों की मौत से अखाड़ों में शोक का महौल था। जिसके चलते अखाड़े बिना बैण्ड-बाजे के ही संगम तट पर पहुंचे और स्नान कर वापस लौट गए।

खराब मौसम और हल्की बारिश के बावजूद लोग बड़ी संख्या में संगम में डुबकी लगाने के लिए जुटे जो गंगा, युमना और मिथकों में वर्णित सरस्वती नदी का मिलन स्थल है।

आग से दो की मौत : महानिर्वाणी अखाड़े के शिविर में आज तड़के आग लगने से राजस्थान झुंझनू के 72 वर्षीय महावीर प्रसाद हिमांशू की मौत हो गई। हिमांशू के परिजन को मुख्यमंत्री राहत कोष से दो लाख रुपए की राशि देने का ऐलान किया गया है। हादसे में घायल महावीर प्रसाद की पत्नी को 25 हजार रुपए दिए जाएंगे। वही सूत्रों के अनुसार इसमें एक महिला के और मरने की सूचना है। हालांकि मेला प्रशासन ने अभी एक की मौत बताई है।

कुंभ मेला कमिश्नर देवेश चतुर्वेदी ने आज शाम मीडिया सेंटर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि अंतिम शाही स्नान के मौके पर कड़ी व्यवस्था के बीच 70 लाख से अधिक लोगों ने पवित्र स्नान किया। उन्होंने बताया कि तेज वर्षा के दौरान संगम के घाटों और वहां तक पहुंचने के रास्तों में कोई दुर्घटना न हो इस बात का पूरा ध्यान रखा गया। बरसात को देखते हुए कल्पवासियों और यात्रियों के लिए 36 विद्यालयों में स्थायी तौर पर रूकने का इंतजाम किया गया था।

अखाड़ों का स्नान : आज के स्नान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम के तहत वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा होने के कारण लोगों को ‘घाटों’ पर स्नान के लिए कई मील चलना पड़ा।

वसंत पंचमी के मौके पर अंतिम शाही स्नान होने के कारण आज तड़के से ही संगम पर चहल पहल शुरू हो गई थी और नगा साधुओं के अखाड़े अंतिम शाही स्नान के लिए जुलूसों की शक्ल में जा रहे थे। हालांकि और दिनों की तरह नग्न, भस्म रमाए साधुओं के हुजूम को देखा जा सकता था जो गले में गेंदे की मालाएं और रुद्राक्ष पहने, हाथों में तलवार लिए स्नान के लिए जा रहे थे।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने दो दिन पहले ही ऐलान किया था कि वह अंतिम ‘शाही स्नान’ में भगदड़ के दौरान मारे गए 39 तीर्थयात्रियों के प्रति संवेदना जाहिर करने के तौर पर दिखावे से दूर रहेगा।

सेक्स स्कैंडल मामले में फंसे स्वामी नित्यानन्द ने शाही स्नान में हिस्सा नहीं लिया और न ही वो महानिर्वाणी अखाडे के शाही जुलूस में ही दिखाई दिए। बसंत पंचमी के शाही स्नान के लिए सबसे पहले लगभग पांच बजे महानिर्वाणी व अटल अखाड़े को समय दिया गया था। पूरी शान और शौकत के साथ, लेकिन सादगी में निकले शाही जुलूस ने सबसे संगम पर लगभग 6 बजे पहुंच कर स्नान किया और वापस लौट गए।
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उसके बाद निरंजनी व आनन्द अखाड़ों की बारी थी जिसमें सबसे आगे अखाड़ों के महन्त व उनके साधु-संत व देश विदेश से आए उनके संत चल रहे थे उसके बाद जूना, आवाहन, पंचाग्निभन, निर्मोही, दिगंबर, निर्वाणी, नया पंचायती अखाड़ा, बड़ा पंचायती अखाड़श और सबसे अन्त में लगभग दोपहर 3:40 पर निर्मल पंचायती अखाड़े का शाही जुलूस निकला और संगम तट पर पहुंचकर जमकर स्नान किया।

गौरतलब है कि दस फरवरी को मौनी अमावस्या के मौके पर पिछले ‘शाही स्नान’ के दौरान यहां रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में 39 तीर्थयात्री मारे गए थे। यही वजह रही की इस बार अखाड़ों ने बैंड बाजों से साथ जुलूस नहीं निकाला।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम : किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए आज के स्नान की व्यवस्था के तहत पीडब्ल्यूडी और जल निगम को भी पूरी सतर्कता बरतने के आदेश दिए गए थे। बरसात के कारण बढ़ी सर्दी से बचाव के लिए हर चौराहे पर अलाव जलाने की व्यवस्था करने के आदेश दिए गए थे।

कुंभ मेला इलाके में सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए थे और पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों समेत 25 हजार कर्मियों को यह सुनिश्चित करने के काम में लगाया गया था कि अंतिम प्रमुख स्नान शांतिपूर्ण तरीके से निपट जाए।

विशेष ट्रेन और बस चलायी गई : पवित्र स्नान के बाद शहर से तीर्थयात्रियों की सुचारू तरीके से वापसी सुनिश्चित करने के लिए आज से रविवार तक 70 विशेष ट्रेनें चलायी जाएंगी। ये ट्रेनें नियमित आधार पर चलने वाली ट्रेनों से अलग होंगी।

उत्तरप्रदेश रोडवेज भी तीर्थयात्रियों की भीड़ कम करने के लिए छह हजार अतिरिक्त बसें चला रहा है। कल से ही शहर में भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित है और ये प्रतिबंध कल शाम तक लगे रहने की संभावना है।

कुंपूर्होनघोषणा : बसंत पंचमी का अंतिम शाही स्नान संपन्न होने के साथ ही आज अखाड़ों के शिविरों पर लहराती धर्म ध्वजा ढीली कर अखाड़ों ने विधिवत् इलाहाबाद कुंभ पूर्ण होने की घोषणा की।

अखाड़ों की परंपरा के अनुसार आज इलाहाबाद कुंभ मेले का अंतिम शाही स्नान करने के बाद अखाड़ों ने अपने अपने शिविर में वापस लौटकर कुंभ की शुरुआत में स्थापित की गई धर्म ध्वजा को एक तरफ की रस्सी खोलकर ढीला कर दिया और इस तरह कुंभ मेला पूर्ण होने की रस्म अदा की।

परंपरा के अनुसार अब शाही स्नान नहीं होंगे इसलिए अखाड़ों के लिए एक तरह से कुंभ संपन्न हो गया। कुंभ की बाकी बची अवधि में केवल पर्व स्नान किए जाएंगे। बसंत पंचमी के स्नान के साथ ही अखाड़े अपने अपने स्थानों की ओर रवाना हो जाएंगे, जबकि शिव के उपासक संन्यासी अखाड़े शिवरात्रि पर शिव की नगरी बनारस पहुंचकर शाही स्नान करेंगे।

आजम खान को साधुवाद : एक अन्य घटनाक्रम में गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी अधोक्षजानंद ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा आजम खां के इस्तीफे को अस्वीकार करने का स्वागत करते हुए कहा कि दुर्घटना एक इत्तेफाक थी।

उन्होंने कहा कि आजम खां ने मुस्लिम होने के बावजूद हिंदुओं के इस सबसे बड़े आयोजन की व्यवस्था को पूरी तन्यमयता से अंजाम दिया, जो सामाजिक सौहार्द की मिसाल है। (वेबदुनिय/एजेंसी)

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