परमहंस योगानंद की प्रमुख उपलब्धियां और योगदान:
1. 'आटोबायोग्राफी ऑफ अ योगी': योगानंद की सबसे प्रसिद्ध किताब है 'आटोबायोग्राफी ऑफ अ योगी', जो 1946 में प्रकाशित हुई थी। यह किताब उनके जीवन की यात्रा और योग, ध्यान, और आत्मज्ञान की गहरी समझ को प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक न केवल भारत में बल्कि पश्चिमी दुनिया में भी बहुत प्रसिद्ध हुई और कई लोगों को आत्म-ज्ञान की ओर आकर्षित किया।
2. क्रियायोग का प्रचार: परमहंस योगानंद ने क्रियायोग को पश्चिमी दुनिया में प्रचारित किया। क्रियायोग एक विशेष प्रकार का ध्यान और श्वास प्रणाली है, जो व्यक्ति के शरीर और मन को शुद्ध करने में मदद करता है। उन्होंने इसे 'वैज्ञानिक ध्यान' के रूप में प्रस्तुत किया।
3. योग और विज्ञान का मेल: योगानंद जी ने योग और विज्ञान के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया। उनका मानना था कि योग के अभ्यास से न केवल मानसिक शांति प्राप्त होती है, बल्कि यह शरीर को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है।
4. यूपी और अमेरिका में आश्रमों की स्थापना: 1920 में योगानंद जी अमेरिका गए थे, जहां उन्होंने 'सेल्फ-रियलाइज़ेशन फ़ेलोशिप' (SRF) की स्थापना की। इस संगठन का उद्देश्य भारत और पश्चिम के बीच आध्यात्मिक ज्ञान का आदान-प्रदान करना था। उन्होंने भारत और अमेरिका दोनों में कई आश्रमों की स्थापना की, जहां लोग योग, ध्यान और आत्म-ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते थे।
5. भारत में और विदेशों में एकात्मता का संदेश: परमहंस योगानंद ने अपने जीवन में हमेशा एकता और मानवता के सिद्धांतों को फैलाया। उनका संदेश था कि सभी धर्म एक ही परम सत्य की ओर ले जाते हैं और हमें हर किसी का आदर करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आध्यात्मिकता का कोई एक निश्चित रास्ता नहीं होता, बल्कि हर व्यक्ति को अपनी आत्मा से जुड़ने का तरीका खोजने का अधिकार है।
परमहंस योगानंद का प्रभाव: उनका जीवन और शिक्षाएं आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनके ध्यान और योग के प्रशिक्षण ने न केवल भारत में, बल्कि दुनिया भर में एक गहरी आध्यात्मिक जागरूकता पैदा की। वे एक सशक्त दार्शनिक, योगी, और शिक्षक थे, जिन्होंने जीवन को एक गहरी दृष्टि से समझा और आत्मा के सत्य को ढूंढ़ने का रास्ता दिखाया। उनकी जयंती पर, हम उनके द्वारा दिए गए अद्वितीय शिक्षाओं और योग की शक्ति का सम्मान करते हैं।