फैंटेसी स्पोटर्स कंपनी ड्रीम 11 अब भारतीय क्रिकेट टीम की टाइटल प्रायोजक नहीं है और बोर्ड ने उसके विकल्प की तलाश शुरू कर दी है लेकिन यह अगले महीने एशिया कप से पहले होने की संभावना नहीं है।हाल ही में पारित ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक, 2025 के तहत सरकार के वास्तविक धन गेमिंग पर प्रतिबंध लगाने के बाद ड्रीम11 अब भारतीय क्रिकेट टीम का टाइटल प्रायोजक नहीं है।
बीसीसीआई सचिव देवाजीत सैकिया ने इसकी पुष्टि की कि ड्रीम11 के साथ करार खत्म हो गया है और बीसीसीआई विभिन्न राष्ट्रीय टीमों के लिये नये टाइटल प्रायोजक की तलाश की प्रक्रिया में है।
BCCI BREAKS TIE WITH DREAM 11.
- The BCCI has parted ways with Dream XI and says to not indulge with such organisations in future. (TOI). pic.twitter.com/ifYJrP6cwj
सैकिया ने PTI (भाषा) से कहा , हमारा रूख स्पष्ट है। नियम बनने के बाद बीसीसीआई ड्रीम 11 या अन्य गेमिंग कंपनी के साथ प्रायोजन करार नहीं रख सकती। नये नियम के तहत अब इसकी कोई गुंजाइश ही नहीं है।उन्होंने कहा , इसलिये हम दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं और प्रक्रिया जारी है। हम प्रायोजक की तलाश में है और अभी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। कुछ तय होने पर हम मीडिया को जानकारी देंगे।
क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसमें वास्तविक धन की गेमिंग का चलन काफी बढ़ गया है। भारतीय टीम का टाइटल प्रायोजक ड्रीम 11 था और इंडियन प्रीमियर लीग का आधिकारिक फैंटेसी स्पोर्ट्स भागीदार वास्तविक धन वाला ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म माई11 सर्कल है।
ड्रीम 11 ने भारतीय टीम के टाइटल अधिकार लगभग 44 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 358 करोड़ रुपये) में खरीदे थे। उनका करार खत्म होने में अभी एक साल बाकी है लेकिन इसके लिये उन्हें कोई दंड नहीं लगाया जायेगा।
बोर्ड के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा , BCCI अपने प्रायोजक ही परेशानी को पूरी तरह समझता है। यह उनकी गलती नहीं है और भुगतान में चूक के अन्य मामलों की तरह ड्रीम11 पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। यह एक सरकारी नियम है और इसका पूरा पालन ज़रूरी है और मौजूदा हालात में उनके कारोबार पर असर पड़ेगा।उन्होंने कहा , बोर्ड के लाभ पर भी कुछ समय के लिये असर होगा लेकिन हमें नयी योजना बनानी होगी।
अधिकारी ने यह भी कहा कि यूएई में एशिया कप में भारत के पहले मैच में सिर्फ 15 दिन बचे है लिहाजा नया प्रायोजक उससे पहले तलाशना कठिन है।उन्होंने कहा , प्रक्रिया चल रही है। हमें राष्ट्रीय टीम के टाइटल प्रायोजन के करार के लिये विज्ञापन देना है। इसके बाद जो भी प्रस्ताव आयेंगे, उनकी समीक्षा करके फैसला लिया जायेगा। इसमें समय लगेगा।