वानखेड़े की 50वीं सालगिरह पर थिरके गावस्कर, तेंदुलकर ने गाया यह गाना (Video)

WD Sports Desk

सोमवार, 20 जनवरी 2025 (13:04 IST)
वानखेड़े स्टेडियम के 50 साल पूरे होने पर मुंबई क्रिकेट संघ के भव्य समारोह में पूर्व कप्तान लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर और मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने महफिल सजा दी।मुंबई क्रिकेट असोसिएशन ने समारोह से संबंधित एक वीडियो जारी किया है  जिसमें सुनील गावस्कर ने ओम शांति ओम गाने पर नृत्य किया है और सचिन तेंदुलकर ने इस गाने के कुछ बोल गुनगनाए हैं।

वानखेडेवर क्रिकेटची

P.S. - Don't miss Sunny G's apratim dance performance! #Wankhede50 | #MCA | #Mumbai | #Cricket pic.twitter.com/t5DllZ9uEC

— Mumbai Cricket Association (MCA) (@MumbaiCricAssoc) January 19, 2025
महान सुनील गावस्कर ने कहा कि जब भी वह स्टेडियम जाते हैं तो उन्हें ‘घरेलू मैदान पर आने’ का एहसास होता है।उन्होंने कहा, ‘‘जब 1974 में वानखेड़े स्टेडियम बनाया गया था, तो हमारा ड्रेसिंग रूम नीचे था। जब हमने अभ्यास सत्र के लिए पहली बार मैदान में कदम रखा तभी इससे प्यार हो गया था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ इससे पहले हम ब्रेबॉर्न स्टेडियम में खेलते थे। वह एक क्लब (क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया) का मैदान था। लेकिन यहां आकर ऐसा लगा जैसे यह मुंबई क्रिकेट का घरेलू मैदान है। जब भी मैं कमेंट्री के लिए आता हूं तो मुझे वही अहसास होता है। मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।’’

सचिन तेंदुलकर ने कहा कि उन्हें 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट खेलते समय भी ऐसी ही भावनाओं का अनुभव हुआ था।

उन्होंने कहा, ‘‘जब वेस्टइंडीज के खिलाफ श्रृंखला के कार्यक्रम की घोषणा की गई, तो मैंने  एन श्रीनिवासन (तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष) को फोन किया और अनुरोध किया कि क्या श्रृंखला का दूसरा और आखिरी मैच वानखेड़े में खेला जा सकता है क्योंकि मैं चाहता हूं कि मेरी मां मुझे अपना आखिरी मैच खेलते हुए देखें।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ मेरी मां ने उससे पहले कभी भी स्टेडियम आकर मुझे खेलते हुए नहीं देखा था। उस समय उनका स्वास्थ्य ऐसा था कि वह वानखेड़े को छोड़कर किसी अन्य स्थान पर नहीं जा सकती थी। बीसीसीआई ने बहुत शालीनता से उस अनुरोध को स्वीकार कर लिया और मेरी मां और पूरा परिवार उस दिन वानखेड़े में थे। आज जब मैंने वानखेड़े में कदम रखा, तो मैं उन्हीं भावनाओं का अनुभव कर रहा हूं।’’

तेंदुलकर ने कहा कि 2003 में एकदिवसीय विश्व कप फाइनल में पहुंचने के बाद भारत ने इस स्थान पर ही विश्व कप जीता था।उन्होंने विश्व कप जीतने के बाद साथी खिलाड़ियों के द्वारा कंधे पर उठाकर मैदान का चक्कर लगाने के बारे में कहा, ‘‘वह निस्संदेह मेरे जीवन का सबसे अच्छा क्षण था।’’

इस मौके पर पूर्व हरफनमौला और भारत के पूर्व कोच रवि शास्त्री ने बड़ौदा के गेंदबाज तिलक राज के ओवर में छह छक्के लगाने को याद किया।इस कार्यक्रम में शानदार लेजर शो और संगीतमय प्रदर्शन के साथ एक कॉफी टेबल बुक और एक डाक टिकट भी जारी किया गया।

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