अमित शाह के उम्मीदवार बालियान पर क्यों भारी पड़े भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूड़ी?

वेबदुनिया न्यूज डेस्क

शुक्रवार, 15 अगस्त 2025 (07:30 IST)
Constitution Club of India election: पहली बार ऐसा मौका है जब कांस्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया का चुनाव सुर्खियों में है। इसका सबसे बड़ा कारण दोनों ही उम्मीदवारों का भाजपा से जुड़ा होना है। इस चुनाव में सारण से भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूड़ी ने भाजपा के ही पूर्व केन्द्रीय मंत्री संजीव बालियान को 100 से अधिक वोटों से हराया है। दरसअल, इस मुकाबले को 'भाजपा बनाम भाजपा' की लड़ाई के रूप में देखा गया। इसमें पार्टी की अंदरूनी खींचतान भी सामने आ गई।
 
संजीव बालियान की उम्मीदवारी को कुछ भाजपा नेताओं का समर्थन मिला, जबकि राजीव प्रताप रूड़ी को विपक्षी दलों के सांसदों का भरपूर समर्थन मिला। रूड़ी ने खुद अपनी जीत के बाद कहा कि उनके पैनल में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस जैसे दलों के सदस्य भी शामिल थे। इससे पता चला कि पार्टियों की दीवारों को तोड़कर भी सांसदों ने वोट डाले।

चुनाव में जातिगत समीकरण भी देखने को मिले। रूड़ी राजपूत समुदाय से हैं, जबकि बालियान जाट कम्यूनिटी से आते हैं। इसे 'राजपूत बनाम जाट' के मुकाबले के तौर पर भी देखा गया। इस बार के चुनाव में रिकॉर्ड 707 वोट डाले गए, जो क्लब के इतिहास में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान था। रूड़ी ने यह मुकाबला 100 से ज्यादा वोटों से जीता। 
 
ऐसा भी माना जा रहा है कि बालियान केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उम्मीदवार थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मोदी और शाह के करीबी निशिकांत दुबे ने बालियान की ओर से चुनाव प्रचार की कमान भी संभाली थी। बावजूद इसके वे बालियान को नहीं जिता पाए। वहीं, राजीव के लिए अनुभव और पुराने संपर्क काम आए। इसके चलते उनकी जीत की राह आसान हो गई।

जीत के बाद रूड़ी ने कहा कि मैं 100 से अधिक वोटों से जीता हूं और अगर इसे 1000 मतदाताओं से गुणा किया जाए, तो यह संख्या 1 लाख हो जाती है। यह मेरे पैनल की जीत है। हर किसी ने अपनी पार्टी से उठकर अपना वोट डाला। मेरे पैनल में कांग्रेस, सपा, टीएमसी और निर्दलीय सांसद थे। मुझे पिछले दो दशकों में मेरे प्रयासों का परिणाम मिला। वहीं, बालियान ने चुनाव परिणाम को चुनौती के रूप में लिया है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि परिणाम कोई उपसंहार नहीं, नव-संघर्ष का प्राक्कथन है। 
 
इस चुनाव में खास बात यह रही कि भाजपा दो फाड़ हो गई, जबकि विपक्ष के ज्यादातर नेताओं का रूड़ी को समर्थन मिला। जानकारों की मानें तो रूड़ी की जीत इस बात का भी संकेत है कि भाजपा में मोदी और शाह की पकड़ पहले के मुकाबले कमजोर हुई है। यही कारण है कि भाजपा अध्यक्ष का चुनाव भी लगातार टल रहा है। 
 
कौन हैं राजीव प्रताप रूड़ी : राजीव प्रताप रूड़ी पिछले 25 सालों से कांस्टिट्यूशन क्लब के सचिव (प्रशासन) पद पर हैं। वह इस पद पर लगातार चौथी बार चुने गए हैं, उन्होंने हाल ही में हुए चुनाव में अपने ही पार्टी के नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री संजीव बालियान को हराया। रूड़ी को 1999 में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष जीएमसी बालयोगी ने इस पद के लिए नामित किया था। सचिव का पद क्लब के कार्यकारी कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

राजीव सारण से सांसद हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य को चुनाव में हराया। इससे पहले वे रोहिणी की मां राबड़ी देवी को भी इस सीट से हरा चुके हैं। वह अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। वह भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राष्ट्रीय महासचिव के रूप में भी काम कर चुके हैं। वे प्रशिक्षित कमर्शियल पायलट भी हैं। 
 
कब हुई थी कांस्टिट्यूशन क्लब की स्थापना : कांस्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया एक ऐसा क्लब है, जिसके सदस्य केवल वर्तमान और पूर्व सांसद हो सकते हैं। इसकी स्थापना फरवरी 1947 में संविधान सभा के सदस्यों को आपस में मिलने-जुलने और चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। आजादी के बाद, इसे सांसदों के क्लब के रूप में मान्यता मिली और इसका औपचारिक उद्घाटन 1965 में तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने किया। यह क्लब 'सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड है।
 
वर्तमान में यह क्लब सांसदों और पूर्व सांसदों के लिए एक सामाजिक और राजनीतिक मंच के रूप में कार्य करता है। यहां जिम, स्विमिंग पूल, रेस्टोरेंट और विभिन्न कार्यक्रमों के लिए हॉल जैसी सुविधाएं भी हैं। लोकसभा अध्यक्ष इस क्लब के पदेन अध्यक्ष होते हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

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