कन्हैया के मुताबिक उन्होंने जेएनयू में कभी भी देश विरोध नारे नहीं लगाए। सरकार के इशारे पर पुलिस प्रशासन ने उन्हें गिरफ्तार तो कर लिया, लेकिन कोर्ट के सामने वे इस बात को साबित नहीं कर पाए कि वहाँ कोई देश विरोध नारे लगाए गए।
जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ने कहा 'हम सीना ठोंक के कहते है कि जेएनयू में नारे लगते है...लेकिन देश विरोधी नहीं...बल्कि देश को जोड़ने और कमजोरों की आवाज उठाने के लिए नारे लगाए जाते है...जब रोहित बैमूला के साथ गलत होता है तब नारे लगते है, जब जुबीन के साथ गलत होता है तब नारे लगते है...जब किसान के साथ गलत होता है तब नारे लगते है...जब बेकसूरों पर जुल्म होता है तब नारे लगते है...और आगे भी लगते रहेंगे।'
कार्यक्रम में मौजूद भगत सिंह दीवाने ब्रिगेड के संयोजक आनंद मोहन माथुर ने कहा कि देश और राज्य की भाजपा सरकार दमकारीनीति अपनाकर अपना खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाना चाहती है, लेकिन भगतसिंह दीवानों की ब्रिगेड ऐसे कमजोर की आवाज बनकर सरकार को दमनकारी नीति अपनाने से हर मोर्चे पर रोकेगी।
उन्होंने कहा कि आजादी से पहले अंग्रेज भी इस प्रकार की दमनकारी नीति अपनाते थे, अब गोरे अंग्रेज चले गए हैं, और काले अंग्रेज देश में दमनकारी नीति अपना रहे है। इसके खिलाफ उनकी लड़ाई है। यदि इनके खिलाफ आवाज उठाना देशद्रोह है, तो हम ये देशद्रोह का आरोप झेलने के लिए तैयार है।
कार्यक्रम के बाद कन्हैया ने एक बार फिर इंदौर में आजादी के लिए आवाज उठाई....और सरकार व्दारा अपनाई जा रही आम जनता विरोधी नीति का विरोध किया। इस पूरे कार्यक्रम पर विरोध करने वालों का भी साया मंडराता रहा, जिसके चलते भारी पुलिस बल हॉल के अंदर से लेकर बाहर तक तैनात रहा। कन्हैया के यहाँ से बाहर निकलने के बाद ही पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली।
क्या है कार्यक्रम : स्टूडेंट फेडरेशन ने 15 जुलाई से सद्भावना यात्रा (लांग मार्च) शुरू की है। यह यात्रा तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात होते हुए मध्यप्रदेश में भी सफर तय करेगी। यात्रा आज यानी बुधवार को इंदौर पहुंची है। इसी यात्रा में कन्हैया कुमार भी शामिल हैं। यात्रा का उद्देश्य लोगों में सांप्रदायिक सद्भाव, एकता और समानता की भावना जगाना है। यात्रा भारत-पाक सीमा के आखिरी गांव हुसैनीवाला में 12 सितंबर को खत्म होगी।