उन्होंने कहा कि देश में एटीएम, क्रेडिट/डेबिट कार्ड के बाद मोबाइल मनी के प्रचलन को लेकर पहले अनुमान था कि इसे लोक प्रचलन में आने में दस से पंद्रह साल का समय लगेगा जैसे मोबाइल के मामले में हुआ। पर अब भरोसा हो गया है कि यह काम चार से पांच साल में हो सकता है।
उन्होंने कहा कि नब्बे के दशक में जब भाजपा की मुंबई में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सात आठ मोबाइल फोन लाए गए थे तो बड़े अखबारों में इसी बात की खबर छपी थी और आलोचना भी हुई थी लेकिन आज करीब करीब दो दशक बाद मोबाइल देश के कोने कोने में लोगों के अस्तित्व का अंग बन गया है। गरीब से गरीब तबके, मजदूर, रेहड़ी पटरी वाले और अशिक्षित लोग भी मोबाइल का प्रयोग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मोबाइल मनी का प्रयोग बहुत आसान है और गरीब किसान मजदूर भी पूरी सुरक्षा के साथ वित्तीय लेन देन कर सकते हैं। अनुमान है कि 2020-22 तक मोबाइल मनी का प्रयोग करने वालों की संख्या 40 से 50 करोड़ तक जा सकती है। यह किसी एक देश में मोबादल मनी के इस्तेमाल करने वालों की सर्वाधिक संख्या हो सकती है। (वार्ता)