प्रधानमंत्री बोले- 1 हजार गांधी, 1 लाख मोदी भी नहीं कर सकते देश स्वच्छ

सोमवार, 2 अक्टूबर 2017 (12:56 IST)
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधी जयंती के मौके महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर विज्ञान भवन आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि स्वच्छता अभियान के तीन साल में हम आगे बढ़े हैं। बेशक, इसके लिए लोगों ने मेरी आलोचना की कि हमारी 2 अक्टूबर की छुट्टी खराब कर दी। मेरा स्वभाव है कि बहुत-सी चीजें झेलता रहता हूं। झेलना मेरा दायित्व भी है और झेलने की कैपेसिटी भी बढ़ा रहा हूं। हम तीन साल तक लगातार लगे रहे। हालांकि देश के कई राज्य अभी भी खुले में शौच से मुक्त नहीं हो पाए हैं। इस काम में चुनौतियां हैं, लेकिन इससे भागा नहीं जा सकता।

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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोई इंसान ऐसा नहीं है, जिसे गंदगी पसंद हो। मूलत: हमारी प्रवृत्ति स्वच्छता पसंद करने की है। हम महात्मा गांधी के बताए रास्ते पर चल रहे हैं। देश का मीडिया जल्द ही उनकी तस्वीरें छापेगा जो स्वच्छ भारत अभियान से दूर भाग रहे हैं। जब देश स्वीकार कर लेता है तो आप चाहें या न चाहें, आपको उससे जुड़ना पड़ता है।
 
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक हजार महात्मा गांधी, 1 लाख मोदी भी मिलकर स्वच्छ भारत का सपना पूरा नहीं कर सकते हैं, जब तक जनता साथ नहीं जुड़ेगी तब तक यह पूरा होगा।

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स्वच्छता अभियान भारत सरकार का नहीं, देश के सामान्य आदमी का सपना बन चुका है। अब तक जो सफलता मिली है वह देशवासियों की है, सरकार की नहीं। समाज की भागीदारी के बिना स्वच्छता मिशन पूरा नहीं हो सकता।
 
प्रधानमंत्री ने उदाहरण दिया कि हमने एक गांव शौचालय बनाए बाद में वहां जाकर देखा तो  लोगों ने उनमें बकरियां बांध रखी थी, लेकिन इसके बावजूद हमें काम करना है। समाज का सहयोग जरूरी है। सरकार सोचे कि हम इमारतें बना देंगे और टीचर दे देंगे तो सब कुछ ठीक हो जाएगा तो ऐसा नहीं है। घरवाले अगर बच्चे को स्कूल नहीं भजेंगे तो शिक्षा का प्रसार कैसे होगा। समाज की भागीदारी बहुत जरूरी है।

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प्रधानमंत्री ने कहा-बच्चे स्वच्छता के सबसे बड़े एम्बैसेडर हैं। जो बात बच्चों के गले उतर गई है वह हमें समझ क्यों नहीं आती। प्रधानमंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि हाथ धोने की कहते हैं तो कहते हैं, पानी तो है नहीं। प्रधानमंत्री मोदी को गाली देने के हजार विषय हैं, मैं हर दिन कुछ न कुछ देता हूं, तो देते रहें, लेकिन अपना दायित्व निभाएं।
 
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज से चार पांच साल पहले टीवी पर कई स्टोरी बनती थी कि स्कूल में बच्चों से सफाई करवाते हैं। आज बदलाव आया है कि किसी स्कूल के बच्चे स्वच्छता अभियान में हिस्सा ले रहे हैं तो टीवी की मेन खबर बन जाती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पांच साल बाद जो गंदगी करेगा उसकी खबर बनेगी। अब ये मिशन किसी सरकार का नहीं है बल्कि पूरे देश का है। हमें स्वराज्य मिला, श्रेष्ठ भारत का मंत्र स्वच्छता है।

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उन्होंने कहा कि स्वच्छता का आंकड़ा तेजी से सुधरा है। उस हिसाब से गति तो ठीक है, लेकिन स्वच्छता के विषय को जब तक एक महिला के नजरिये से नहीं देखेंगे तब तक नहीं समझेंगे। एक घर में सबको कूड़ा-करकट फैलाने का अधिकार है, लेकिन एक मां उसको साफ करती रहती है। उस महिला का दर्द समझें और गंदगी न फैलाएं।
 
कल्पना करें कि गांव में रहने वाली माताएं-बहनें प्राकृतिक कार्य के लिए अंधेरे में जाती हैं। उजाला हो गया और शौच जाने की इच्छा हुई तो वह रात तक अंधेरे का इंतजार करती हैं। अपने शरीर के साथ दमन करती हैं। आप उन माताओं और बहनों का दर्द समझेंगे तो इस कार्य को करेंगे। मैं जबसे प्रधानमंत्री बना हूं तो बहुत से लोग मुझसे मिलते हैं। चलते-चलते बायोडाटा मुझे पकड़ा देते हैं कि मेरे लायक कोई सेवा हो तो बता देना, मैं धीरे से कहता हूं कि स्वच्छता के लिए थोड़ा समय दीजिए।
 
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की है, इसके तहत सरकार का लक्ष्य महात्मा गांधी की 150वीं जयंती को पूरे देश को स्वच्छ बनाने का है। यानी भारत सरकार का लक्ष्य 2019 तक का है। मोदी ने 2 अक्टूबर, 2014 को इस मिशन की शुरुआत की थी।

मोदी ने कहा कि स्वच्छता अभियान भारत सरकार का नहीं, देश के सामान्य आदमी का सपना बन चुका है। अब तक जो सफलता मिली है वह देशवासियों की है, सरकार की नहीं। समाज की भागीदारी के बिना स्वच्छता मिशन पूरा नहीं हो सकता। दुर्भाग्य से हमने बहुत सारी चीजें सरकारी बना दी। हमें समझना होगा कि जब तक जनभागीदारी होती है तब तक कोई समस्या नहीं आती है और इसका उदाहरण गंगा तट पर आयोजित होने वाला कुंभ महोत्सव है। 
 
स्वच्छता अभियान पर तंज कसने वालों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज कुछ लोग ऐसे हैं जो अभी भी इसका (स्वच्छता अभियान) मजाक उड़ाते हैं, आलोचना करते हैं। वे कभी स्वच्छ अभियान में गए ही नहीं। आलोचना करते हैं, तो उनकी मर्जी, उनकी कुछ मुश्किलें होंगी। लेकिन पांच साल पूरा होने पर मीडिया में यह खबर नहीं आएगी कि स्वच्छता अभियान में किसने हिस्सा लिया, कौन काम कर रहा है...खबर यह आएगी कि कौन लोग इससे दूर भाग रहे हैं और कौन लोग इसके खिलाफ थे। क्योंकि जब देश किसी बात को स्वीकार कर लेता है, तब चाहे-अनचाहे आपको स्वीकार करना ही होता है।
 
उन्होंने कहा कि स्वच्छता का सपना अब बापू का सपना नहीं रहा बल्कि यह जनमानस का सपना बन चुका है। अब तक जो सिद्धी मिली है, वह सरकार की सिद्धी नहीं है, यह भारत सरकार या राज्य सरकार की सिद्धी नहीं है। यह सिद्धी स्वच्छाग्रही देशवासियों की सिद्धी है।
 
मोदी ने कहा कि हमें स्वराज्य मिला और स्वरात्य का शस्त्र सत्याग्रह था। सुराज का सशस्त्र स्वच्छाग्रह है। प्रधानमंत्री ने उदाहरण दिया कि एक गांव में शौचालय बनवाया गया। बाद में वहां जाकर देखा तो लोगों ने उनमें बकरियां बांध रखी थी, लेकिन इसके बावजूद हमें काम करना है। समाज का सहयोग जरूरी है। स्वच्छता के लिए जब हाथ साबुन से धोने के अभियान की बात आई तब भी लोगों ने हमें गालियां दीं।
 
उन्होंने कहा कि मोदी को गाली देने के लिए हजार विषय है। हर दिन कोई न कोई ऐसा करता मिलेगा। लेकिन समाज के लिए जो विषय बदलाव लाने वाले हैं, उन्हें मजाक का विषय नहीं बनाया जाए। उन विषयों को राजनीति के कटघरे में नहीं रखें। बदलाव के लिए हम सभी को जनभागीदारी के साथ काम करना है।
 
उन्होंने कहा कि स्वच्छता के लिए वैचारिक आंदोलन भी चाहिए। व्यवस्थाओं के विकास के बावजूद भी परिवर्तन तब तक नहीं आता है जब तक वह वैचारिक आंदोलन का रूप नहीं लेता है।
 
बच्चों समेत अन्य लोगों को पुरस्कार प्रदान करते हुए मोदी ने कहा कि चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिता ऐसे ही वैचारिक आंदोलन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सरकार सोचे कि हम इमारतें बना देंगे और टीचर दे देंगे तो सब कुछ ठीक हो जाएगा तो ऐसा नहीं है। घरवाले अगर बच्चे को स्कूल नहीं भजेंगे तो शिक्षा का प्रसार कैसे होगा। ऐसे में समाज की भागीदारी बहुत जरूरी है।

मोदी ने कहा कि स्वच्छता का आंकड़ा तेजी से सुधरा है। उस हिसाब से गति तो ठीक है, लेकिन स्वच्छता के विषय को जब तक एक महिला के नजरिए से नहीं देखेंगे तब तक हम इसे नहीं समझेंगे। एक घर में कूड़ा-करकट सभी फैलाते हैं लेकिन एक मां उसको साफ करती रहती है। उस महिला का दर्द समझें और गंदगी न फैलाएं। उन्होंने कहा कि कल्पना करें कि गांव में रहने वाली माताएं-बहनें प्राकृतिक कार्य के लिए अंधेरे में जाती हैं। अगर उजाला हो गया और शौच जाने की इच्छा हुई तो वह रात तक अंधेरे का इंतजार करती हैं। आप उन माताओं और बहनों का दर्द समझेंगे तो स्वच्छता के कार्य को करेंगे।
 
उन्होंने कहा कि मैं जबसे प्रधानमंत्री बना हूं तो बहुत से लोग मुझसे मिलते हैं। चलते-चलते बायोडाटा मुझे पकड़ा देते हैं कि मेरे लायक कोई सेवा हो तो बता देना, मैं धीरे से कहता हूं कि स्वच्छता के लिए थोड़ा समय दीजिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि समाज की शक्ति को अगर हम समझेंगे, उसे स्वीकार करेंगे, जनभागीदारी को मानेंगे...तब यह आंदोलन सफल होगा ही।
 
उन्होंने कहा कि कुछ लोग विदेश जाते हैं और वहां की साफ सफाई की चर्चा करते हैं। मैं पूछता हूं कि वहां कूड़ा फेंकते किसी को देख है क्या? मोदी ने कहा कि आज स्वच्छता पर चर्चा हो रही है। स्वच्छता रैकिंग हो रही है। सबसे स्वच्छ शहर कौन है, दूसरे, तीसरे स्थान पर कौन है। इसके लेकर सकारात्मक प्रतिस्पर्धा हो रही है। सरकार से लेकर नेताओं पर दबाव बढ़ रहा है।
 
उन्होंने कहा कि आज दुनिया में देश को आगे बढ़ाने का बड़ा अवसर है। 2022 तक हमें करना है..तब हमें चुप नहीं बैठना है। कौन दोषी है..यह मुद्दा नहीं है...हम सभी को मिलकर यह करना है। (भाषा)

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