2. चैत्र नवरात्रि का महत्व खासकर महाराष्ट्र, आंध प्रदेश, तेलांगना और कर्नाटक में रहता है, जबकि शारदीय नवरात्रि की महत्व खासकर पश्चिम बंगाल और गुजरात में रहता है।
4. दरअसल वासन्तिक (चैत्र) नवरात्र के अंत में रामनवमी आती है, अतएव इस नवरात्रि में शक्ति और विष्णु, दोनों की आराधना की जाती है जबकि शारदीय नवरात्र के अंत में दुर्गा महानवमी आती है, और दूसरे दिन विजयादशीम आती है। मान्यता है कि विजयादशी के दिन जहां मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था वहीं श्रीराम ने रावण का वध किया था। इसलिए इस नवरात्रि में विशुद्ध रूप से शक्ति की उपासना की जाती है।
6. शारदीय नवरात्रि को सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति हेतु मनाया जाता है जबकि चैत्र नवरात्रि को आध्यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति, सिद्धि, मोक्ष हेतु मनाया जाता है।