बताया जा रहा है कि बस स्टैंड क्षेत्र में मस्जिद के पास करीब 45 सालों से सड़क किनारे ये पत्थर पड़े हुए थे। इसकी वजह से यहां जाम की स्थिति बनती थी। प्रशासन की ओर से यहां पत्थरों को हटाने का काम किया जा रहा था। पत्थर हटाने का काम भी पूरा हो गया था। लेकिन जैसे ही यहां रेलिंग लगाने का काम शुरू किया गया, तो कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताई और विरोध करना शुरू कर दिया। लोगों के इसी विरोध ने हिंसा का रूप ले लिया।