When is Eid ul Fitr 2026: ईद-उल-फितर इस्लाम का एक प्रमुख और खुशियों से भरा त्योहार है, जिसे पूरी दुनिया के मुसलमान बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं। यह त्योहार पवित्र महीने रमज़ान के खत्म होने के बाद मनाया जाता है। रमज़ान के पूरे महीने में मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं, नमाज़ अदा करते हैं, कुरान की तिलावत करते हैं और नेक कामों के जरिए अल्लाह की इबादत करते हैं।ALSO READ: Shab E Qadr: शबे कद्र क्या है, 2026 में कब मनाई जाएगी, जानें इतिहास और महत्व
जब रमज़ान का महीना समाप्त होता है और नए चांद का दीदार होता है, तब अगले दिन ईद-उल-फितर मनाई जाती है। 2026 में ईद-उल-फितर भारत में लगभग 20 या 21 मार्च 2026 को मनाए जाने की संभावना है, हालांकि इसकी अंतिम तारीख चांद दिखने पर निर्भर करती है। इसलिए चांद दिखने के बाद ही ईद की सही तारीख घोषित की जाती है।
2026 में ईदुल फितर कब है?
चांद रात (Chand Raat)
क्यों मनाई जाती है ईदुल फितर? (महत्व)
कैसे मनाई जाती है ईद? (परंपराएं)
2026 में इसकी तारीख, इतिहास और परंपराओं की जानकारी नीचे दी गई है:
2026 में ईदुल फितर कब है?
ईदुल फितर की सटीक तारीख चांद दिखने पर निर्भर करती है। वर्तमान खगोलीय गणनाओं के अनुसार भारत में संभावित तारीख: भारत में ईदुल फितर 20 मार्च (शुक्रवार) या 21 मार्च (शनिवार), 2026 को मनाए जाने की संभावना है।
चांद रात (Chand Raat)
यदि 19 मार्च की शाम को शव्वाल का चांद दिखता है, तो ईद 20 मार्च को होगी। अन्यथा, रमजान के 30 रोजे पूरे होने के बाद यह 21 मार्च को मनाई जाएगी।
क्यों मनाई जाती है ईदुल फितर? (महत्व)
ईदुल फितर का अर्थ है 'उपवास तोड़ने का त्योहार'। इसके मनाए जाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
इनाम का दिन: माना जाता है कि अल्लाह ने पूरे रमजान में रोजे रखने और इबादत करने वालों के लिए इस दिन को 'इनाम' के रूप में मुकर्रर किया है।
कृतज्ञता (शुक्राना): यह दिन अल्लाह का शुक्रिया अदा करने का है कि उसने रोजे रखने और आत्म-अनुशासन बनाए रखने की शक्ति प्रदान की।
ऐतिहासिक संदर्भ: मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद (स.अ.व.) ने 'बद्र के युद्ध' में जीत के बाद पहली बार साल 624 ईस्वी में यह त्योहार मनाया था।
कैसे मनाई जाती है ईद? (परंपराएं)
ईद की नमाज: सुबह के समय पुरुष मस्जिदों या ईदगाहों में जाकर विशेष ईद की नमाज अदा करते हैं और अमन-चैन की दुआ मांगते हैं।
जकात-अल-फितर (फितरा): नमाज से पहले हर सक्षम मुसलमान के लिए गरीबों को दान (फितरा) देना अनिवार्य है, ताकि वे भी खुशियों में शामिल हो सकें।
मीठी ईद: इस दिन घरों में सेवइयां और तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। लोग एक-दूसरे के गले मिलते हैं और 'ईद मुबारक' कहते हैं।
ईदी: बड़े बुजुर्ग बच्चों को प्यार और आशीर्वाद के रूप में पैसे या उपहार देते हैं, जिसे 'ईदी' कहा जाता है।
भाईचारा: लोग नए कपड़े पहनते हैं और अपने रिश्तेदारों व दोस्तों के घर जाकर आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देते हैं।
ईदुल फितर का दिन अल्लाह का शुक्रिया अदा करने, आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ाने तथा जरूरतमंदों की मदद करने का संदेश देता है।
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