बलूचिस्तान की सुरम्य पहाड़ियों और हिंगोल नदी के तट पर स्थित हिंगलाज माता मंदिर आस्था का एक ऐसा केंद्र है, जहाँ मजहब की दीवारें धुंधली पड़ जाती हैं। माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक इस स्थान को हिंदू जहाँ परम शक्ति मानते हैं, वहीं मुस्लिम समुदाय इन्हें अत्यंत श्रद्धा के साथ 'नानी पीर' कहकर पुकारता है।
आस्था और इतिहास का संगम
माना जाता है कि यह गुफा मंदिर 2000 वर्षों से भी अधिक पुराना है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहाँ माता सती का मस्तिष्क गिरा था। इस स्थान की महत्ता इतनी है कि यहाँ की यात्रा करने वाली महिलाओं को 'हाजियानी' कहकर सम्मानित किया जाता है। इतिहास गवाह है कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम, गुरु नानक देव और गुरु गोरखनाथ जैसी महान विभूतियों ने भी यहाँ शीश नवाया है।
कठिन डगर, पावन लक्ष्य
कराची से शुरू होने वाली यह यात्रा रेगिस्तानों और पहाड़ों से होकर गुजरती है। मरुतीर्थ की इस यात्रा में भक्त हिंगोल नदी में स्नान कर अपनी शुद्धि करते हैं और कठिन रास्तों को पार कर उस गुफा तक पहुँचते हैं, जहाँ माता साक्षात वैष्णो देवी के रूप में विराजमान हैं। यह मंदिर न केवल शक्ति की उपासना का स्थल है, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द का एक जीवित प्रमाण भी है।