शनिश्चरा मन्दिर, जहां लंका से हनुमानजी ने फेंका था अलौकिक पिण्ड

भगवान शनिदेव के कई चमत्कारिक पीठ या कहें कि मंदिर है। महाराष्ट्र के एक गांव शिंगणापुर में उनका खास मंदिर है जहां उनका जन्म हुआ था। उत्तरप्रदेश के कोशी से छह किलोमीटर दूर कौकिला वन में स्थित है सिद्ध शनिदेव का मन्दिर। इसके अलावा मध्यप्रदेश के ग्वालियर के पास स्थित है शनिश्चरा मन्दिर। इस मंदिर के बारे में जानते हैं संक्षिप्त जानकारी।
 
 
1. शनिश्चरा मन्दिर के बारे में किंवदंती है कि त्रेतायुग में यहां हनुमानजी के द्वारा लंका से फेंका हुआ अलौकिक शनिदेव का पिण्ड है। इसे शनिदेव का सिद्धपीठ माना जाता है।
 
2. यहां शनिशचरी अमावस्या के दिन मेला लगता है। मंदिर में हर शनिश्चरी अमावस्या पर लाखों श्रद्धालु भिण्ड, मुरैना, ग्वालियर, दतिया, झांसी, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर सहित मध्यप्रदेश के कोने-कोने से आते हैं। पड़ोस के राजस्थान, उत्तरप्रदेश, पंजाब हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र से भी शनि की शांति के लिए हजारों लोग शनि मेले में दर्शन को आते हैं और दान पुण्य, पूजा-पाठ व हवन यज्ञ व भंडारा करके पुण्य कमाते हैं।
 
3. भक्तजन यहां तेल चढ़ाते हैं, और अपने पहने हुए कपड़े, चप्पल, जूते आदि सभी यहीं छोड़कर घर चले जाते हैं। इसके पीछे ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से पाप और दरिद्रता से छुटकारा मिल जाता है।
 
4. ऐंती का शनिश्चरा मंदिर त्रेतायुगीन होने के कारण पूरे भारत वर्ष में प्रसिद्ध है। मुरैना जिले में स्थित इस मंदिर की ग्वालियर से मात्र 18 किलोमीटर दूरी है। ऐंती पर्वत पर स्थित यह मंदिर बहुत ही प्राचीन है। 
 
5. मान्यता है कि इस शनि सिद्धपीठ पर जाकर शनि के दण्ड से बचा जा सकता है। 

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