वैशाख अमावस्या की पौराणिक कथा: Vaishakh Amavasya Ki Katha

वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम

गुरुवार, 16 अप्रैल 2026 (09:55 IST)
Vaishakha amavasya Story: वैशाख अमावस्या हिन्दू पंचांग में एक विशेष और पवित्र तिथि है, जो पितृ तर्पण, श्राद्ध और पितरों की शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह दिन  अमावस्या के रूप में आता है और इसे भगवान सूर्य, चंद्रमा और पितरों की पूजा से जोड़ा जाता है।ALSO READ: वैशाख महीना किन देवताओं की पूजा के लिए है सबसे शुभ? जानें इसका धार्मिक महत्व
 
वैशाख मास हिन्दू कैलेंडर का दूसरा महीना है, और इस महीने की अमावस्या को विशेष महत्व इसलिए भी दिया जाता है क्योंकि इस दिन किए गए दान, श्राद्ध और तर्पण के पुण्यकभी नष्ट नहीं होते। इसे करना न केवल धार्मिक दृष्टि से लाभकारी है बल्कि यह कर्मफल और पितृ शांति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।ALSO READ: वैशाख अमावस्या का क्या है महत्व, 5 उपायों से पितरों की होगी शांति
 

आइए यहां जानते हैं वैशाख अमावस्या की कथा के बारे में...

कथा:


वैशाख अमावस्या की पौराणिक कथा के अनुसार बहुत समय पहले धर्मवर्ण नाम के एक विप्र थे। वह बहुत ही धार्मिक प्रवृति के थे। एक बार उन्होंने किसी महात्मा के मुख से सुना कि घोर कलियुग में भगवान श्रीविष्णु के नाम स्मरण से ज्यादा पुण्य किसी भी कार्य में नहीं है। जो पुण्य यज्ञ करने से प्राप्त होता था, उससे कहीं अधिक पुण्य फल नाम सुमिरन करने से मिल जाता है।
 
धर्मवर्ण ने इसे आत्मसात कर सन्यास लेकर भ्रमण करने निकल गए। एक दिन भ्रमण करते-करते वह पितृलोक जा पंहुचे। वहां धर्मवर्ण के पितर बहुत कष्ट में थे। पितरों ने उन्हें बताया कि उनकी ऐसी हालत धर्मवर्ण के सन्यास के कारण हुई है, क्योंकि अब उनके लिए पिंडदान करने वाला कोई शेष नहीं है। यदि तुम वापस जाकर गृहस्थ जीवन की शुरुआत करो, संतान उत्पन्न करो तो हमें राहत मिल सकती है। साथ ही वैशाख अमावस्या के दिन विधि-विधान से पिंडदान करें।
 
पितरों के मुख से यह बात सुनकर धर्मवर्ण ने उन्हें वचन दिया कि वह उनकी अपेक्षाओं को अवश्य पूर्ण करेंगे। तत्पश्चात धर्मवर्ण अपने सांसारिक जीवन में वापस लौट आए और वैशाख अमावस्या के दिन विधि-विधानपूर्वक पिंडदान करके अपने पितरों को मुक्ति दिलाई।  पुराणों में उल्लेख मिलता है कि इस दिन पितरों के प्रति किए गए कर्म और तर्पण, उनके कल्याण और आत्मिक शांति के लिए विशेष महत्व रखते हैं। 
 
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