जर्मनी-ब्राजील मैच में हार-जीत का जुनून

वर्ल्ड कप की रिप्लिका लिए ब्राजील का वह बुजुर्ग अपने जज्बात पर काबू पाना चाहता था, लेकिन इधर वह कुछ संभलता था, उधर जर्मनी एक गोल और कर देता। हर गोल के साथ वह वर्ल्ड कप की डमी को अपनी छाती के और करीब खींच लेता।

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वर्ल्ड कप के 7-1 वाले नतीजे और जर्मन जीत के अलग स्टेडियम का माहौल कुछ इस तरह दिखता था। ब्राजीली पीली जर्सी पहने राष्ट्रीय झंडे लपेटे लोगों की आंखें खेल के शुरुआती मिनटों में ही गीली होने लगीं, जब खतरनाक जर्मनों ने गोलों का पहाड़ खड़ा करना शुरू कर दिया।


टेलीविजन के कैमरामैनों के लैंस बार-बार उस बुजुर्ग के पास सिमट जाया करते। झक सफेद मूंछों वाले इस शख्स को ब्राजील के दूसरे मैचों में भी देखा गया था। हर बार वह वर्ल्ड कप की इस रिप्लिका के साथ मौजूद होता, लेकिन तब उसकी सूरत कुछ अलग हुआ करती थी। ब्राजील जीत रहा होता था, तो उसके चेहरे पर भी खुशी झलक रही होती।

लेकिन सेमीफाइनल के इस मैच में सब कुछ बदला-बदला था। आगे की पंक्ति में खड़ा यह शख्स समझ नहीं पा रहा था कि दुनिया की सबसे बड़ी फुटबॉल टीम को हुआ क्या है। आंखों के किनारे से झरते आंसू वह चाहकर भी रोक नहीं पा रहा था। उधर, निर्मम जर्मन टीम कभी मुलर, कभी क्लोजे, तो कभी खेदीरा के रूप में उस पर वज्रपात कर देती। वह वर्ल्ड कप की रिप्लिका कुछ और करीब भींच लेता।

पास खड़ा पांच-छ: साल का बच्चा उस बुजुर्ग का पोता है या नहीं, यह तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन इतना पक्का है कि वह पीढ़ियों को जोड़ने वाली तीसरी कड़ी जरूर है। बीच की पीढ़ी मैदान पर तार-तार हो रही थी और तीनों पीढ़ियां इस ऐतिहासिक विध्वंस की अनचाही गवाह बन रही थीं। आंसू कप्तान डाविड लुइस के भी निकल रहे थे, इस बुजुर्ग के भी और वैसी ही पीली जर्सी पहने उस छोटे बच्चे के भी।

दुनिया भर में फुटबॉल से पहचाना जाने वाला देश ब्राजील भारी विडंबना और निराशा के बीच सिर पीट रहा था। 90 मिनट के मैच में नतीजा तो शायद 24वें मिनट में ही निकल आया था, जब जर्मनी ने तीसरा गोल ठोंक दिया और उसके बाद का वक्त ब्राजीली फैंस ने आंसू बहाते और बाकी की दुनिया ने सोशल मीडिया पर मजाक उड़ाते हुए बिताया। साओ पाओलो में जहां गुस्साए दर्शकों ने बसों में आग लगा दी, वहीं कुछ लोग फेसबुक-ट्विटर पर गम हलका करने लगे।

सबसे लोकप्रिय ब्राजील में ईसा मसीह की वह मूर्ति हुई, जो यूं तो बाहें फैलाए हुए है लेकिन फेसबुक, ट्विटर ने उसे शर्म से चेहरा ढंकते हुए दिखा दिया। कुछ तो और आगे भी निकल गए और उन्होंने इस मूर्ति की जगह बांहें फैलाए जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर लगा दी। अब इस जीत और हार में मैर्केल के योगदान को लेकर विशद चर्चा बाकी है।

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