'क्या है गुरु पुष्य योग?' : 'गुरु पुष्य योग' तब बनता है, जब 'पुष्य नक्षत्र' हो, और वही दिन 'गुरुवार (गुरु वार)' हो। पुष्य नक्षत्र को 'नक्षत्रों का राजा' कहा गया है, और यह 'समृद्धि, व्यापार, खरीदारी, पूजा, दान और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ' माना जाता है। गुरुवार बृहस्पति (गुरु) का दिन है, जो 'धर्म, ज्ञान और शुभता' का प्रतीक है। दोनों के मिलने से यह 'अभूतपूर्व योग' बनता है।