देश दुनिया पर प्रभाव:
इसके प्रभाव से प्रकृति में असामान्य घटनाएं घट सकती है कई जगह वर्षा, हिमपात तथा भूकंप की घटनाएं ज्यादा परेशान करेगी, मंगल साहस, वीरता, लड़ाई, झगड़े का भी कारक माना जाता है मंगल के गोचर की वजह से विश्व में भी अशांति का खतरा तथा हिंसा घटनाएं अपना भयावरूप दिखा सकती है मंगल का गोचर भारत में भी राजनीतिक उथल-पुथल तथा सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा दे सकता है। ग्रहों के सेनापति मंगल युद्ध, क्रोध, साहस, आवेग, भूमि के कारक माने जाते हैं मंगल का कर्क राशि में जाना ज्योतिषी दृष्टिकोण से अच्छा नहीं माना जाता मंगल का नीच राशि कर्क में गोचर प्राकृतिक आपदाएं तथा जन-धन की हानि करवा सकता है।
1. मिथुन राशि: मिथुन राशि के जातकों के लिए मंगल का गोचर द्वितीय भाव में होगा, इन राशि वाले जातकों के लिए द्वितीय भाव में मंगल अपनी नीच राशि में विराजमान होंगे। जिस वजह से इन लोगों के पारिवारिक जीवन में अशांति हो सकती है तथा धन भाव के अंदर मंगल के होने से आर्थिक हानि का भी सामना करना पड़ सकता है। मंगल के द्वितीय भाव में होने से व्यक्ति का स्वास्थ्य भी प्रभावित रहेगा।
2. कर्क राशि: कर्क राशि के जातकों के लिए मंगल का गोचर लग्न भाव में होगा। लग्न भाव में नीच राशि पर मंगल के होने के कारण मंगल की दृष्टि सप्तम भाव पर होगी। जिस कारण व्यक्ति का अपने जीवन साथी के साथ में मतभेद या तनाव हो सकता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी मंगल का यह गोचर कर्क राशि वालों के लिए अच्छा नहीं है। अष्टम भाव पर मंगल की दृष्टि की वजह से व्यक्ति के जीवन में दुर्घटना होने की संभावना है।
4. धनु राशि: धनु राशि के जातकों के लिए मंगल का गोचर अष्टम भाव में होगा, अष्टम भाव में मंगल के होने के कारण व्यक्ति को दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है तथा मंगल की दृष्टि धन भाव पर होने की वजह से आर्थिक हानि के योग बनेंगे। अतः व्यक्ति विवादित चीजों से सावधान रहे एवं आर्थिक लेनदेन में सतर्क रहें।
5. मकर राशि: मकर राशि के जातकों के लिए मंगल का गोचर सप्तम भाव में होगा, सप्तम भाव में मंगल के होने के कारण व्यक्ति का अपने जीवन साथी के साथ में विवाद मतभेद हो सकते हैं अथवा जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रह सकती है। मंगल का यह गोचर मकर राशि वालों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ाएगा, जिससे व्यक्ति का कामकाज प्रभावित हो सकता है।