23 April 2026 Today Shubh Muhurat: क्या आप आज कोई नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं? या कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले हैं? ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य को सही मुहूर्त में करने से सफलता की संभावना बढ़ जाती है। 'वेबदुनिया' आपके लिए लेकर आया है 23 अप्रैल, 2026 का विशेष पंचांग और शुभ-अशुभ मुहूर्त।ALSO READ: 13 महीने का साल और खप्पर योग: शनि की चाल पलटेगी दुनिया की किस्मत, क्या आने वाला है कोई बड़ा संकट?
आइए जानें आज का दिन आपके लिए क्या लेकर आया है।
23 अप्रैल 2026, गुरुवार का पंचांग और शुभ मुहूर्त नीचे दिया गया है। आज वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। आज का दिन गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है, जो मां गंगा की उत्पत्ति और उनके पृथ्वी पर अवतरण का पावन पर्व है। गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए विशेष माना जाता है।
23 अप्रैल 2026: आज का पंचांग
तिथि: षष्ठी - सुबह 05:15 एएम (24 अप्रैल) तक, उसके बाद सप्तमी।
मास: वैशाख (शुक्ल पक्ष)।
वार: गुरुवार।
नक्षत्र: आर्द्रा - शाम 03:39 पीएम तक, उसके बाद पुनर्वसु।
योग: सुकर्मा - रात 01:28 एएम (24 अप्रैल) तक, उसके बाद धृति।
करण: तैतिल - शाम 05:28 पीएम तक, फिर गर।
चंद्र राशि: मिथुन - रात 10:14 पीएम तक, उसके बाद कर्क।
सूर्य राशि: मेष (उच्च राशि में)।
आज के शुभ और अशुभ समय
अभिजीत मुहूर्त (सबसे शुभ)-11:41 एएम से 12:33 पीएम
अमृत काल- 06:05 एएम से 07:44 एएम
ब्रह्म मुहूर्त-04:07 एएम से 04:55 एएम
राहुकाल (अशुभ समय)-01:57 पीएम से 03:34 पीएम
यमगण्ड- 06:00 एएम से 07:31 एएम
गुलिक काल-09:07 एएम से 10:43 एएम
आज के मुख्य उत्सव और महत्व:
गंगा सप्तमी (Ganga Saptmi): पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आज के दिन ही गंगा जी स्वर्ग से शिव की जटाओं में आई थीं। आज गंगा स्नान और पूजन से सात जन्मों के पाप धुल जाते हैं।
गुरुवार और पुनर्वसु: शाम को पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी स्वयं बृहस्पति (गुरु) है। गुरुवार को गुरु के ही नक्षत्र का होना विद्या, अध्यात्म और निवेश के लिए अत्यंत शुभ संयोग बनाता है।
सुकर्मा योग: आज 'सुकर्मा' योग बन रहा है। इस योग में किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना प्रबल होती है और समाज में मान-सम्मान बढ़ता है।
उच्च का सूर्य: मेष राशि का सूर्य आपके आत्मविश्वास और ऊर्जा को शिखर पर रखेगा।
आज का विशेष उपाय: आज के दिन पीले वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु को केसर युक्त दूध का भोग लगाएं। यदि कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर है, तो आज चने की दाल और गुड़ का दान किसी मंदिर में करें। इससे रुके हुए मांगलिक कार्य बनने लगते हैं।ALSO READ: ganga saptami katha: गंगा सप्तमी की पौराणिक कथा