स्मृति आदित्य

मैं भारत के 70 प्रतिशत गांवों की अमराइयों में महकती हूं। मैं लोकगीतों की सुरीली तान में गुंजती हूँ। मैं नवसाक्षरों का...
हिन्दी दिवस आजकल हमारे देश में एक औपचारिकता मात्र रह गया है लेकिन आज भी कुछ संस्थानों में हिन्दी पखवाड़ा, हिन्दी सप्ताह...
परंपरानुसार कहा जाता है कि श्री गणेश को उसी तरह बिदा किया जाना चाहिए जैसे हमारे घर का सबसे प्रिय व्यक्ति जब यात्रा पर...
मेरे विद्यार्थियों, आप उस युग में जी रहे हैं, जिसमें स्रोतों की प्रचुरता है, आगे बढ़ने के बहुत से द्वार हैं पर याद रखना,...
2 सितंबर 2019 को भगवान श्री गणपति का पृथ्वी पर शुभागमन हो रहा है। प्रथम पूज्य श्री गणेश हमारे अति विशिष्ट, सौम्य और आकर्षक...
गुलजार जब लिखते हैं तो लिखते कहां है वह तो प्रकृति से शब्द फूल उठाकर कागज पर आहिस्ता से रख दे‍ते हैं। चुंकि वह 'फूल' गुलजार...
गुलजार ने नज्में लिखीं, तो कहानियां छपीं। गीत लिखे, तो निर्देशन में आ गए। कहा‍नियां लिखीं, तो पटकथाओं में ख्याति पाई।...
भाई-बहन के फुरसत में मिलने भर की देर है, यादों के शीतल छींटे पड़ते ही अतीत के केसरिया पन्नों से चंदन-बयार उठने लगती है।...
श्रावण मास के आरंभ होने से कई दिनों पूर्व से ही सवारी की तैयारी होने लगती है। जिस दिन सवारी घर के सामने से या शहर के मुख्य...
उनकी आवाज में ओज था, विचारों में ताजगी, हौसले बुलंद थे और उनकी निर्णय क्षमता का पूरी दुनिया ने लोहा माना। सुषमा स्वराज...
वाणी में ओज, चेहरे पर तेज, सौम्य उजास, ममता बरसाती आंखें, सजीली मीठी मुस्कान... सुषमा स्वराज... कैसे लिखूं कि नहीं रहीं ..एक...
कश्मीर पर तकनीकी, राजनीतिक और संवैधानिक पक्षों से इतर यह एक भावुक पोस्ट है। बचपन से पढ़ा, कश्मीर भारत का स्वर्ग है। कश्मीर...
इस मोहक मनभावन त्योहार पर इस बार बांधें कुछ ऐसी राखियों को जो हर भाई-बहन के जीवन जीने का अंदाज बदल दें.... यह राखी है प्यार,...
तलाक, तनाव, लानत और कष्ट से मिला छुटकारा... लेकिन क्या सच में? जी हां, राहत और सुकून की यह बयार बधाई की हकदार है। यह बहार उन...
सुना आपने? बरेली के भाजपा विधायक की बेटी साक्षी घर से भाग गई!!! कान खड़े हुए, आंखें चौड़ी हुई, मुंह खुला रह गया, खबरों पर...
आपको मेरा प्रणाम पहुंचे। हर साल आप 4 बार पृथ्वी पर आती हैं। दो बार धूमधाम से और दो बार गुप्त रूप से। इन दिनों भी आप गुप्त...
अलबर्टो के बहाने कुछ सोचें हम भी अपने लोगों के बारे में.. अपने अपनों के बारे में.. शायद कोई हल निकले... फिर किसी नदी में न...
मैं नहीं समझ पा रहा हूं कि मैं अपना गुनाहगार खुद हूं या समाज से छनकर आती विकृत खबरों ने मुझे ऐसा बनाया पर यकीन मानो बेटी...
मीठा बचपन, गुलाबी हंसी, चहकती किलकारियां... ये मैं किसकी बात कर रही हूं, कौन सा जमाना था वो जब ये हमारी जिंदगी की खूबसूरती...
मां अपने दिन का आरंभ चाहे 'ॐ अस्य श्री रामरक्षा स्रोत मंत्रस्य...' से करे, चाहे 'वाहे गुरु दी कृपा....' से, चाहे 'ला इल्लाह...'...