स्मृति आदित्य

जब हम गृह प्रवेश करते हैं तो नई आशा, नए सपने, नई उमंग स्वाभाविक रूप से मन में हिलोर लेती है। आइए जानें 20 जरूरी बातें जो...
होली का रंगबिरंगा पर्व आ गया है लेकिन कोरोना की कालिमा ने सारे रंगों को जैसे ग्रहण लगा दिया है। कोरोना के साये में मनाई...
'द व्हाइट टाइगर फिल्म ऑस्कर की दौड़ में शामिल हो चुकी है। यह फिल्म लेखक अरविंद अडिगा की किताब पर आधारित है। अरविंद अडिगा...
इंदौर शहर की जानी-मानी महिला शक्ति स्तंभ-समाज सेविका श्रीमती जनक पलटा मगिलिगन, जितनी वे स्वयं सरल, सहज और सौम्य हैं उनका...
बहुत मन होता है कि दिवस के बहाने कुछ सकारात्मक सोचें, मगर जब चारों ओर दहेज, बलात्कार, अपहरण, हत्या, आत्महत्या, छेड़छाड़...
मैं भी आयशा ही हूं लेकिन जिंदा आयशा... तुम्हारे और मेरे नसीब में ज्यादा फर्क नहीं है। वही सब कुछ मेरे साथ भी हुआ जो तुम्हारे...
हाथरस में एक पिता अपनी बेटी की अस्मत के लिए लड़ता है और जान से हाथ धो बैठता है और अहमदाबाद में एक पिता अपनी बेटी को मरने...
प्रिय आयशा, 8 मार्च से पहले तुम हर स्त्री को स्तब्ध कर गई... मुझे लगा जैसे तुम हर स्त्री को उसके भीतर की स्त्री से मिला गई,...
क्या बस यही विकल्प बचा था। पिता को हिम्मत देती, पिता के साथ खड़ी तुम जीत जाती मगर ये तुमने क्या किया... प्यार न मिले तो क्या...
लेखिका ज्योति जैन साहित्य संसार में तेजी से लेकिन सरलता से उभरता वह चमकता नाम है जिसने साहित्य की लगभग हर विधा में स्वयं...
मधुबाला! भारतीय रजतपट की वीनस! वीनस यानी शुक्र। आकाश का सबसे अद्वितीय सितारा। ज्योतिष शास्त्र कहता है कि शुक्र कलात्मक...
नर्मदा की प्रेम-कथा लोकगीतों और लोककथाओं में अलग-अलग मिलती है लेकिन हर कथा का अंत कमोबेश वही कि शोणभद्र के नर्मदा की...
अगर इंसानियत के थोड़े भी कण दिल, दिमाग और देह ‍में शेष हैं तो गुना में गर्भवती महिला मामला देख सुन कर आपकी आंखें शर्म...
जल अर्थात् पानी का धन-दौलत से बहुत करीब का संबंध माना गया है। दोनों ही समान गुणधर्मी होते हैं। दोनों की प्रकृति है बहना।...
दिन के साथ ही दिल भी खिलता है, मौसमों के साथ मन भी बदलता है... इन दिनों प्यार का मौसम अंगड़ाई ले रहा है.. यह 14 तारीख का नशा...
बापू और हरिलाल दोनों अपनी जगह अच्छे थे, सच्चे थे, सही थे लेकिन परिस्थितियों के दंश ने एक सुयोग्य पुत्र को कंटीली राह...
इस दिन की शुभता पर भला कैसे प्रश्न चिन्ह खड़े किए जा सकते हैं? लेकिन आज हम गण के तंत्र का तमाशा देखते रह गए हैं .. किसान...
चाहती हूं कि इन रंगों को रख दो मेरी हथेलियों पर कि जब मैं निकलूं तपती हुई पीली दोपहर में अकेली तो इन्हें छिड़क सकूं...दुनिया...
कैफी की कलम का करिश्मा ही था कि वे ‘जाने क्या ढूंढती रहती हैं ये आंखें मुझमें’, जैसी कलात्मक रचना के साथ सहज मजाकिया...
भारतेंदु स्वयं लेखक, कवि, पत्रकार, संपादक, निबंधकार, नाटककार, व्यंग्यकार एवं कुशल वक्ता थे। उनकी इस प्रतिभा से रूबरू...