कोरोना वायरस: लॉकडाउन के दौर से कैसे निकल रहे हैं देश

शनिवार, 18 अप्रैल 2020 (10:15 IST)
जब तक कोविड-19 का टीका तैयार नहीं कर लिया जाता, तब तक सोशल डिस्टेन्सिंग ही इस महामारी का सबसे कारगर 'इलाज' है। कोरोना वायरस से फैली इस महामारी को देखते हुए अधिकांश प्रभावित देशों में यह प्रचार किया जा रहा है कि 'सुरक्षित दूरी ही बचाव है।'
 
सोशल डिस्टेन्सिंग को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कोरोना के संक्रमण से प्रभावित अधिकांश देशों ने लॉकडाउन का रास्ता चुना, चाहे एशिया हो, मध्य-पूर्व हो, यूरोप के देश हो या फिर अमरीका। अब जिन देशों को यह लग रहा है कि उनके यहाँ इस महामारी का 'पीक' यानी सबसे ख़राब दौर गुज़र गया है, वे लॉकडाउन को समाप्त करने की रणनीति बना रहे हैं।
 
भारत में 22 मार्च को जनता कर्फ़्यू समाप्त होने के साथ ही 21 दिन के लॉकडाउन की शुरुआत हुई थी। 21 दिन का ये लॉकडाउन 14 अप्रैल को पूरा होना था, पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकारों के साथ चर्चा के बाद इसे 3 मई तक बढ़ाने का फ़ैसला किया। भारत सरकार ने कहा है कि 20 अप्रैल के बाद स्थिति का जायज़ा लेकर देश के कुछ इलाक़ों को लॉकडाउन से सशर्त छूट दी जाएगी।
 
लॉकडाउन का अंत कहाँ से?
 
जो देश अब इस महामारी से उबरने का दावा कर रहे हैं, उन्होंने और उनके यहाँ सेवाएं देने वाली कंपनियों ने लॉकडाउन के बाद की तैयारी शुरू कर दी है। जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने घोषणा की है कि 'वे धीरे-धीरे प्रतिबंधों को समाप्त करने की ओर बढ़ना चाहती हैं।'
 
उन्होंने कहा है कि सोशल डिस्टेन्सिंग से जुड़े नियमों का फ़िलहाल पालन करना होगा, लोगों को घरों से बाहर आने पर मास्क पहनना होगा, पर सार्वजनिक परिवहन अब शुरू किया जाएगा, साथ ही सीमित आकार (800 स्क्वायर मीटर से कम) की दुकानें और गाड़ियों मोटरसाइकिलों के स्टोर खोल दिये जाएंगे। जर्मनी ने तय किया है कि 4 मई के बाद बड़ी सावधानी के साथ चुनिंदा स्कूलों को खोला जाएगा, पर सभी धार्मिक आयोजन और बड़ी दावतों पर 31 अगस्त तक प्रतिबंध रहेगा।
 
मर्केल ने कहा है कि 'लॉकडाउन का सख़्ती से पालन करने की वजह से ही उन्हें इस महामारी को नियंत्रित रखा जा सका।' जर्मनी में क़रीब सवा लाख लोग कोविड-19 से संक्रमित पाये गए हैं जिनमें से 3200 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
 
जर्मन सरकार ने कहा है कि अभी बहुत ज़्यादा सतर्क रहने का समय है। इसी को ध्यान में रखते हुए जर्मन सरकार ने तय किया है कि रेस्त्रां, बार, सिनेमाघर, बड़े हॉल और कैफ़े फ़िलहाल बंद ही रहेंगे।
 
यूरोप के अन्य देशों में भी तैयारी
डेनमार्क में 11 वर्ष तक के बच्चों के स्कूल खोल दिये गए हैं। साथ ही नर्सरी स्कूल भी खुल गये हैं। स्कूल प्रशासन को हिदायत दी गई है कि वे बच्चों की साफ़ सफ़ाई का विशेष ध्यान रखें।
 
ऑस्ट्रिया ने भी फ़ैसला किया है कि वो अपना यहाँ छोटी दुकानों को इस सप्ताह खोल देगा। साथ ही मैदान में एक-दूसरे से दूरी बनाकर खेले जाने वाले खेल, जैसे टेनिस, गोल्फ़ आदि खेलने की 1 मई से इजाज़त दे दी जाएगी।
 
यूरोप में महामारी का सबसे बड़ा केंद्र रहे इटली में भी क़िताबों की दुकानें और बच्चों के कपड़ों की दुकानें खोलने से शुरुआत हुई है।
 
स्पेन सरकार ने तय किया है कि कंस्ट्रक्शन और मैन्युफ़ैक्चरिंग के काम को शुरू कर दिया जाए। इसे देखते हुए कंपनियों ने अपने कारीगरों को काम पर बुलाना शुरू कर दिया है। साथ ही छोटी-मोटी घरेलू सेवाएं देने वाले मिस्त्रियों को भी काम करने की इजाज़त दे दी गई है।
 
स्पेन में बार्सेलोना शहर की मेयर ने सरकार से अपील की है कि अब बच्चों पर लगे सख़्त प्रतिबंधों में थोड़ी ढील दी जाए। स्पेन सरकार ने आदेश दिया था कि बच्चे किसी भी स्थिति में घर से बाहर नहीं आ सकते।
 
मुख्य रूप से यूरोप में सेवाएं देने वाली विमान कंपनी ईज़ी जेट ने निर्णय किया है कि लॉकडाउन के बाद विमान सेवाएं शुरू होने पर वे अपने विमानों में बीच की सीट खाली ही रखेंगे ताकि लोगों को सटकर ना बैठना पड़े। ईज़ी जेट ने 23 मार्च को अपनी सभी उड़ानें रोक दी थीं।
 
कंपनी के सीईओ एल जोहान ने कहा है कि इससे लोगों में विश्वास पैदा होगा कि विमान में यात्रा करना अब असुरक्षित नहीं है। हालांकि कुछ देश अभी भी मौजूदा स्थिति को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।
 
मसलन, फ़्रांस ने लॉकडाउन को चार और हफ़्तों के लिए बढ़ा दिया है। अब वहाँ 11 मई तक लॉकडाउन रहेगा। वहीं, बेल्जियम ने भी प्रतिबंधों को कम से कम 3 मई तक बढ़ा दिया है।

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