महेश मांजरेकर की फिल्म "सिटी ऑफ गोल्ड" में आप एक अधपगले युवक को देखते हैं और उसकी एक्टिंग से सिहर जाते हैं। मगर उसका नाम आपको नहीं पता। रोहित शेट्टी की फिल्म "गोलमाल" में आप एक किरदार देखते हैं जो आपको खूब हँसाता है। आप उसे चाहते हैं, पसंद करते हैं मगर उसका जिक्र किसी से नहीं करते क्योंकि एक बार फिर उसका नाम आपको नहीं पता।
फिर वो युवक लगातार दिखता है, बार-बार दिखता है। ये युवक किसी फिल्म निर्माता या सितारे का पुत्र नहीं है, जिसका नाम आपके दिमाग में ठसाने के लिए कोई पब्लिसिटी कैंपेन चले और जिसे बहुत सजा कर आपके सामने पेश किया जाए।
चेहरे-मोहरे में ये औसत से भी कम है। हेल्थ हाइट भी मामूली। मगर प्रतिभा...! बीस सितारा पुत्रों से ज्यादा अभिनय क्षमता इस युवक में है। नाम है सिद्धार्थ जाधव। मराठी फिल्मों और नाटकों का जाना पहचाना नाम। कुछेक हिन्दी फिल्में भी की हैं।
सिद्धार्थ जाधव जन्म से मुंबईकर हैं। मराठी भाषा और संस्कृति में रचे-बसे। सिद्धार्थ ने अभी तक बाइस मराठी हिन्दी फिल्मों और चार-पाँच नाटकों में काम किया है और बेहतर अभिनय के बारह अवॉर्ड उन्हें मिल चुके हैं। यानी हर दूसरी तीसरी फिल्म या नाटक में अवॉर्ड विनिंग काम।
पहली फिल्म २००६ में की। फिल्म का नाम "जत्रा"। भाषा मराठी। हिन्दी में पहली बार मौका दिया रोहित शेट्टी ने। फिल्म "गोलमाल" का वो संवाद बहुत गुदगुदाने वाला है- आपके पिछवाड़े कभी कील घुसा है? नहीं? तो फिर आप मेरा दर्द नहीं समझ सकते...। यही सिद्धार्थ जाधव अब सोनी चैनल पर कॉमेडी शो में बतौर प्रतियोगी आ रहे हैं और सभी कॉमेडियन के लिए चुनौती पेश कर रहे हैं। स्टैंडअप कॉमेडियन बस कॉमेडियन है, पर सिद्धार्थ जाधव कलाकार हैं, अभिनेता हैं।
हम हिन्दी फिल्म दर्शक फिल्में तो खूब देखते हैं, पर ज्यादातर कलाकारों को नहीं जानते। पर्दे के पीछे रह कर बेहतरीन काम करने वालों की तो बात ही क्या, पर्दे पर भी बेहतर काम करने वालों से हम अनजान रहते हैं। हमारे लिए जो कुछ है, हीरो है। हीरोइन है। एक हद तक विलेन है। ओम पुरी, नसीरुद्दीन शाह, परेश रावल जैसे कलाकार इतनी मशहूरी कैसे पा सके, यह राज है।
एक जमाना था जब गीतकार का नाम फिल्म के पोस्टर पर नहीं होता था। साहिर लुधियानवी ने जिद करके यह सिलसिला शुरू कराया। फिर बहुत बड़े और अच्छे शायर फिल्म गीतकार के तौर पर उभरे और अब फिर आपको पता नहीं चलता कि गीतकार कौन है। केवल इंटरनेट पर ही इस तरह की जानकारी होती है।
फिल्मों में महत्वपूर्ण रोल करने वाले किस कलाकार का नाम क्या है, यह नहीं दिखाया जाता। नाटकों में आज भी यह परंपरा है कि नाटक खत्म होने के बाद कलाकार अपना परिचय खुद देता है। फिल्मों में कहीं बारीक अक्षरों में नाम आते हैं और तेजी से चले जाते हैं।
अगर फिल्मों में भी नाटकों की तरह सभी कलाकारों का बाकायदा परिचय कराया जाता तो कई अनाम कलाकार आज सितारे होते। सिद्धार्थ जाधव ने ऐसे ही माहौल में बहुत कम समय के अंदर नाम पैदा किया है। ये कलाकार लंबा टिकेगा और खूब काम करेगा, क्योंकि इसमें बहुत गहरी प्रतिभा है।