महिला दिवस नहीं, पुरुष दिवस होना चाहिए : अमित साध

"महिला दिवस नहीं पुरुष दिवस होना चाहिए, खास तौर पर हमारे देश में, जहां एक खास दिन पुरुषों को बैठा कर उन्हें सही आचरण की किताब देकर पाठ पढ़ाना चाहिए कि कैसे हम मर्द कई जगहों पर महिलाओं को ले कर गलत हो जाते हैं या उन्हें दुखी कर देते हैं। मेरे हिसाब से तो महिला दिवस की ज़रूरत ही नहीं है।"
 
काई पो छे, सुल्तान और सरकार 3 के अभिनेता अमित साध का मानना है कि आज की महिलाओं को नहीं मर्दों को बदलने की ज़रूरत है। अमित ने कहा कि जिस देश में महिला को सम्मान नहीं है मान कर चलिए कि वो देश कभी आगे नहीं बढ़ सकता। 
 
आपको क्या लगता है जो देश में महिलाओं को मज़बूत बना सकता है?
सोच बदलने की ज़रूरत है। थोड़ा ही कर लिया तो भी बहुत हो जाएगा। हाल ही में मेरे एक दोस्त ने कहा कि मैं अपनी पत्नी की बहुत इज़्ज़त करता हूं। मैंने भी कह दिया कोई मेडल नहीं मिलेगा इस काम के लिए। यह बात कह कर बताने या जताने वाली नहीं है।  
 
आपकी ज़िंदगी में कोई है जिसे आप धन्यवाद कहना चाहेंगे? 
मैं अपनी सारी गर्लफ्रेंड्स को धन्यवाद कहना चाहता हूं। आज जो हूं उनकी वजह से ही हूं। उन्होंने बहुत कुछ सिखाया है। जैसे,  स्कूल में मेरी अंग्रेजी बहुत खराब हुआ करती थी। इस बात पर मेरी एक गर्लफ्रेंड मुझे हर बार टोका करती थी और मुझे बुरा भी नहीं लगता था। 3-4 महीने पहले ही मुझे उसका मैसेज आया कि अब मैं अच्छी इंग्लिश बोलने लगा हूं। मैंने भी उसे कहा कि तुमसे ही सीखी है। एक बार मेरी गर्लफ्रैंड ने मुझे तमीज़ की बात सिखाई। मुझे सीढ़ियां फटाफट उतरने की आदत है। एक बार हम सीढ़ी से उतर रहे थे। मैं फौरन नीचे पहुंच गया। उसने मुझे ऊपर बुलाया और कहा कि मैंने हील्स पहनी है, ज़रा ठीक से मेरे हाथों को पकड़ कर चलो। उस समय तो बड़ा गुस्सा आया, लेकिन ठीक तीन या चार दिन बाद हम फिर ऐसी जगह पहुंचे जहां नीचे उतरना था। मैंने कहा कि जब उतरना चाहो तो बता देना मैं अदब के साथ ले जाऊंगा। यह सुन वह बेहद खुश हुई। 
 
आज की लड़कियों को कुछ कहना चाहेंगे? 
कुछ नहीं... क्योंकि मुझे तो लड़के और लड़की वाला फर्क करना नहीं आता। सब बराबर हैं। 
 
अमित साध इन दिनों 'ब्रीद' नाम की वेब सिरीज़ में काम कर रहे हैं और । जल्द ही रीमा कागती की फिल्म गोल्ड में भी नज़र आएंगे। 'गोल्ड' में वे अक्षय कुमार के साथ हैं। 
 

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