जॉब का चयन सूझबूझ से करें

मंगलवार, 26 जून 2012 (16:36 IST)
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नौकरी पाने के सपने को सच होता देख किसे अच्छा नहीं लगता। यही तो वह सपना होता है जिसकी वजह से कोई भी व्यक्ति अखबार के क्लासिफाइड सेक्शन का एक-एक शब्द पढ़ डालता है। इसी सपने को सच करने की मेहनत में हजारों कंपनियों में इंटरव्यू के लिए अर्जी देता है। इंटरव्यू कॉल आने पर बहुत खुश होते हैं और नौकरी मिल जाने पर आँख बंद करके 'हाँ' बोल देते हैं।

लेकिन ये इतना सरल नहीं। ऐसे बहुत से विषय हैं जिनके बारे में नौकरी के लिए हां बोलने से पहले जरूर सोचा जाना चाहिए। कैसे जानें कि यह ऑफर अच्छा है या नहीं? इस प्रश्न के उत्तर के लिए कुछ बिंदुओं पर ध्यान देना जरूरी है जैसे-

वेतन - यह विषय तो नौकरी लेने से पहले सोचा जाने वाला आम विषय है, लेकिन इससे जुडी एक बात है। कई बार लोग नौकरी अच्छी होने के बाद भी वेतन की वजह से उसे छोड़ देते हैं। अगर आपको नौकरी और उससे जुड़ी संभावनाएं सही लग रही हैं तो वेतन के बारे में एक बार बात करके जरूर देखें। हो सकता है कि आपकी बात मान ली जाए।

ऑफिस का माहौल- आपको काम करने में मज़ा तभी आएगा जब काम करने वाली जगह का माहौल खुशनुमा होगा। अगर ऑफिस का माहौल आपके अनुरूप है तो यह आपको अच्छा काम कर दिखाने में मदद करेगा। आपको बस यह देखना है कि जिस दफ्तर में आप काम करने का मन बना रहे हैं, वहां के माहौल में आप कितनी जल्दी ढल जाएंगे।

ऑफिस से घर की दूरी- इस ओर भी थोड़ा ध्यान देना जरूरी है। इंटरव्यू के लिए जाते समय जो दूरी ठीक लग रही थी हो सकता है रोज जाने के लिए वही दूरी थोड़ी ज्यादा लगे।

आपके बॉस और सहकर्मी- आपके बॉस और सहकर्मी कैसे हैं, यह जानना तो सबसे महत्वपूर्ण है। जिनके साथ आपको काम करना है अगर वे लोग सही नहीं होंगे तो उस जगह काम करना शायद मुश्किल हो जाए।

इंटरव्यू के समय कोशिश कीजिए देखने की कि दफ्तर में बैठे लोगों का रवैया कैसा है। क्या वे सब खुशमिजाज और मित्रवत हैं? यह थोड़ा मुश्किल है लेकिन जरूरी भी। अपने जान-पहचान में से ऐसे लोगों से बात करने की कोशिश करें जो वहां काम करते हों या वहां काम करने वाले किसी व्यक्ति को जानते हों।

सारी चीजों पर सोचकर आप जो भी फैसला करें नौकरी लेने का या छोड़ने का, इस बारे में उस दफ्तर में जरूर बताएं। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि आप नहीं जानते हैं कि भविष्य में आपके लिए क्या छुपा हुआ है। हो सकता है इन्हीं लोगों से आपका फिर कभी सामना हो जाए। अपने हाथों अपनी छ‍‍व‍ि बिगाड़ना कोई समझदारी तो नहीं।

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