Diwali 2024 : भारत एक विविधताओं से भरा देश है, जहां हर क्षेत्र की अपनी अनोखी संस्कृति, परंपराएँ और मान्यताएँ हैं। दिवाली जैसा मुख्य त्यौहार भारत के अधिकांश हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन कुछ ऐसे स्थान भी हैं जहाँ इसे नहीं मनाया जाता। इस लेख में हम जानते हैं कि आखिर इन जगहों पर दिवाली क्यों नहीं मनाई जाती और इसके पीछे की दिलचस्प वजहें क्या हैं।
केरल के कुछ खास इलाकों में भी नहीं मनती है दिवाली
भारत के दक्षिणी राज्य केरल में भी कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ दिवाली का उत्सव मनाने का प्रचलन नहीं है। केरल में मान्यता है कि दिवाली के दिन ही उनके महान राजा महाबली की मृत्यु हुई थी। केरल के लोगों के लिए महाबली राजा बहुत पूजनीय हैं और उनकी याद में ओणम का त्योहार मनाया जाता है। दिवाली का दिन उनके लिए शोक का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे उत्सव के रूप में नहीं मनाया जाता।
दूसरा कारण यह है कि केरल में अक्टूबर-नवंबर के महीने में बहुत ज्यादा बारिश होती है। इस कारण से पटाखे जलाना और दीये जलाना काफी मुश्किल हो जाता है। अधिकतर समय बारिश के कारण दीपों और पटाखों का आनंद नहीं उठाया जा सकता। यही वजह है कि यहां दिवाली का उत्सव नहीं मनाया जाता। हालांकि, कोच्चि में कुछ लोग दिवाली मनाते हैं, लेकिन बाकी राज्य में यह आम नहीं है।
पश्चिम बंगाल का कुछ हिस्सा
पश्चिम बंगाल में माँ काली की पूजा का विशेष महत्व है, और यहाँ दिवाली के बजाय काली पूजा का पर्व मनाया जाता है। इसे "श्यामा पूजा" भी कहते हैं, और इस दिन बंगाल में माँ काली की विशेष पूजा होती है। हालाँकि, इस दौरान दीप जलाने का रिवाज होता है, लेकिन इसे दिवाली की तरह नहीं माना जाता। यह बंगाल की विशेष संस्कृति और परंपरा को दर्शाता है, जहाँ शक्ति की देवी काली का स्थान बहुत महत्वपूर्ण है।
मिजोरम और नागालैंड के ईसाई समुदाय
भारत के पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम और नागालैंड में ज्यादातर ईसाई धर्म के अनुयायी रहते हैं। यहाँ लोग क्रिसमस को सबसे बड़े पर्व के रूप में मनाते हैं। इसके कारण, दिवाली का त्यौहार यहाँ प्रचलित नहीं है। हालांकि, हाल के वर्षों में कुछ शहरों में दिवाली मनाई जाती है, लेकिन इसे पारंपरिक उत्सव की तरह नहीं देखा जाता है।