गुजरात के सूरत स्थित उधना रेलवे स्टेशन पर उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाले हजारों प्रवासी श्रमिकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लगभग 40 डिग्री की चिलचिलाती धूप में लोग 2 किलोमीटर लंबी लाइनों में 14 से 16 घंटे तक खड़े रहने को मजबूर हुए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्टेशन पहुंचने के लिए मची भगदड़ और लोगों की बेबसी साफ देखी जा सकती है।
भीषण गर्मी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव
भीषण गर्मी और उमस के कारण यात्रियों की हालत बदतर हो गई। खाने-पीने की व्यवस्था तो दूर, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नाकाफी थीं। इस अराजकता के बीच सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और छोटे बच्चों को हुई। घंटों लाइन में खड़े रहने के कारण प्यास और थकावट से कुछ यात्री बेहोश भी हो गए, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
पुलिस और जनता के बीच झड़प
भीड़ इतनी अनियंत्रित हो गई थी कि लोगों ने स्टेशन में प्रवेश करने के लिए बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) करना पड़ा, हालांकि रेलवे प्रशासन ने लाठीचार्ज की बात से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ 'शरारती तत्वों' ने व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की थी, जिन्हें समय रहते हटा दिया गया।
पलायन का मुख्य कारण LPG संकट
इस बार भारी भीड़ की एक बड़ी वजह गर्मियों की छुट्टियों के साथ-साथ LPG गैस का गहराता संकट भी बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिमी एशिया में तनाव के चलते 5 किलो के खुले सिलेंडर के दाम 80 रुपए से बढ़कर 400 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। महंगाई और ईंधन की कमी के कारण श्रमिकों के लिए सूरत में गुजारा करना मुश्किल हो गया है, जिससे वे वतन वापसी को मजबूर हैं।
रेलवे के दावे बनाम जमीनी हकीकत
रेलवे प्रशासन का दावा है कि स्थिति को संभालने के लिए विशेष ट्रेनें चलाई गई हैं और लगभग 23,000 यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया है। हालांकि, प्रशासन के दावों और स्टेशन पर दिख रही बदहाली के बीच बड़ा अंतर नजर आया। एक यात्री का यह कहना कि "मैं अब कभी वापस नहीं आऊंगा," उन लाखों श्रमिकों के दर्द और निराशा को बयां करता है जो अव्यवस्था की भेंट चढ़ गए।