गौमूत्र से संभव है कैंसर का इलाज

नंदकिशोर गोइनका
गाय के दही, मूत्र तथा तुलसी पत्रों के योग से असाध्य कहे जाने वाले रोग कैंसर की औषधि तैयार की जा सकती है। इससे कैंसर के अनेक रोगियों को रोगमुक्त करने में सफलता मिली है। वह योग निम्न प्रकार से तैयार किया जा सकता है।
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भारतीय नस्ल की गाय के दूध का एक पाव से आधा किलो दही, 4 चम्मच गोमूत्र, 5 से 10  पत्ते तुलसी पत्र, कुछ शुद्ध मधु- इन चारों पदार्थों को एक पात्र में मिलाकर, मथकर प्रात:काल खाली पेट प्रतिदिन केवल एक बार पीने से तथा 1 वर्ष तक के इस प्रयोग से प्रारंभिक अवस्था का कैंसर पूरी तरह दूर हो जाता है। 

गोमूत्र में हरड़ (हर्रे) भिगोकर धीमी आंच पर गरम करें। जलीय भाग जल जाने पर उस हरड़ का चूर्ण बना लें। अब इस चूर्ण का प्रतिदिन सेवन करें।यह चूर्ण अनेक रोगों की रामबाण दवा है। 
 
दरअसल गोमूत्र में काबोलिक एसिड भी होता है, जो कीटाणुनाशक है। इसमें हृदय और मस्तिष्क के विकारों को भी दूर करने की जादुई क्षमता है।
 
इसके अलावा गाय के शरीर पर हाथ फेरने से, उसके श्वास से अनेक प्रकार के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। गोबर के कंडों की राख से दुर्गंध देखते ही देखते काफूर हो जाती है। कब्ज, खांसी, दमा, जुकाम, जीर्ण ज्वर, उदर रोग तथा चर्म रोग आदि में गोमूत्र रामबाण दवा का काम करता है। 

उपरोक्त उपाय आजमाने से पूर्व चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। 
संदर्भ : कल्याण 

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