करवा चौथ पर कविता : ऐ चांद तुम जल्दी से आ जाना...

ऐ चांद तुम जल्दी से आ जाना 
भूखी-प्यासी मैं दिनभर की बेकरार 
छलनी से करूंगी साजन का दीदार 
शर्म लाल होंगे तब मेरे रुखसार 
पिया मिलन में देर न लगा जाना 
ऐ चांद तुम जल्दी से आ जाना। 
 
मेहंदी रचे हाथ, सजे कंगन के साथ 
पूजा का थाल, और ले करवा हाथ 
मांगूंगी तुमसे रहे सजना सदैव साथ 
लंबी उम्र का वर, पिया को दे जाना 
ऐ चांद तुम जल्दी से आ जाना। 
 
मेरा साज-श्रृंगार सब साजन से है 
बिखरा जीवन में प्यार साजन से है
घर और परिवार सब साजन से है
सातों जन्म के साथ का वर दे जाना 
ऐ चांद तुम जल्दी से आ जाना।
 
माना भूख से मैं न अकुलाऊंगी तब
पर पिया की बेचैनी मैं सह पाऊंगी कब 
मेरे प्रिय पिलाए मुझे अधर सुधा जब 
बादलों में तुम छुप जाना, पर पहले..
ऐ चांद तुम जल्दी से आ जाना।
 
 

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