Madhya Pradesh Bhagoria Haat Dates: भगोरिया हाट और मेला मध्य प्रदेश और गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में एक अद्वितीय सांस्कृतिक उत्सव है, जो विशेष रूप से होली के पहले सप्ताह में मनाया जाता है। यह मेला न केवल आदिवासी संस्कृति को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह एक प्रमुख सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी है, जहां लोग अपने रीति-रिवाजों, नृत्य, संगीत और पारंपरिक वेशभूषा के साथ एकत्र होते हैं।ALSO READ: Holi 2026: लठमार से लेकर फूलों वाली होली तक, भारत में कितने तरह से मनाई जाती है होली? जानिए खास परंपराएं
बता दें कि इस बार मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ अंचल के आदिवासियों का सुप्रसिद्ध 'भगोरिया उत्सव' 2026 में 24 फरवरी, मंगलवार से शुरू हो चुका है। यह उत्सव होली, होलिका दहन के दिन यानी 2 मार्च तक चलेगा। इस साल मध्य प्रदेश सरकार ने इसे 'राजकीय उत्सव' का दर्जा दिया है। यह हाट और मेले मुख्य रूप से झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी और खरगोन जिलों में लगते हैं।
01 मार्च : झाबुआ, काकनवानी, छकतला, धोलियावाड़, रायपुरिया, कुलवट और सोरवा।
02 मार्च 2026: भाबरा, अलीराजपुर, पेटलावद, बड़ागुड़ा, रंभापुर, मोहनकोट और कुंदनपुर।
हाट और मेले की खास बातें
प्रमुख जिले: मध्य प्रदेश के झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी और खरगोन।
प्रमुख आकर्षण: ढोल-मांदल की थाप पर आदिवासी नृत्य, चांदी के भारी आभूषण, और पारंपरिक वेशभूषा।
वालपुर का भगोरिया: अलीराजपुर जिले का 'वालपुर' का भगोरिया सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक माना जाता है, यहां मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र तीनों राज्यों की संस्कृति का संगम दिखता है।
आदिवासी पकवान: मेलों में आप ताड़ी, मक्के की राबड़ी, और गराडू जैसे स्थानीय व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं।
नोट: भगोरिया अब केवल स्थानीय पर्व नहीं रहा, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का केंद्र बन चुका है। यदि आप यहां जाने की योजना बना रहे हैं, तो झाबुआ या अलीराजपुर को अपना मुख्य केंद्र बना सकते हैं।
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